इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आयु को लेकर विरोधाभाषी तथ्यों के बीच कई दिनों तक बिना विरोध के साथ रही प्रेमिका का अपहरण और दुष्कर्म का दावा भरोसे लायक नहीं हो सकता। अभियुक्त आयु के विरोधाभास का लाभ पाने का अधिकारी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने याची मोहित की ओर से दाखिल जमानत अर्जी मंजूर करते हुए दिया।
मामला शामली जिले के थानाभवन थाना क्षेत्र के जलालाबाद का है। याची के अधिवक्ता बीडी निषाद ने बताया कि 10 सितंबर 2023 को आरोपी मोहित के खिलाफ पीड़िता के पिता ने नाबालिग बेटी के अपहरण का मुकदमा दर्ज करवाया था। आरोप लगाया था कि उसकी करीब 13 वर्षीय बेटी छह सितंबर से घर से गायब है। खोजने पर जानकारी मिली है कि उसको आरोपी बहला फुसला कर भागा ले गया है। इसके बाद पुलिस ने प्रेमी जोड़े को बरामद कर आरोपी को जेल भेज दिया। पीड़िता ने अपने कलमबंद बयान में अपनी आयु करीब 17 वर्ष बताते हुए जबरन शारीरिक संबंध बनने की बात बताई। साथ ही यह भी बताया कि वह आरोपी के साथ दिल्ली गई थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ
पाक्सो और दुष्कर्म की धाराएं बढ़ा दीं। हालांकि, कोर्ट ने आदेश पर हुए ऑक्सिफिकेशन टेस्ट में उसकी आयु करीब 16-17 वर्ष निर्धारित की गई। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए कहा कि पीड़िता ने अपने कलमबंद बयान में अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगाने के साथ ही यह भी बताया की वह अभियुक्त के साथ दिल्ली समेत कई जगहों की यात्रा की। इस दौरान उसने कहीं भी अपना विरोध दर्ज नहीं कराया। इसलिए पीड़िता की आयु और अभियोजन की कहानी अविश्वसनीय है। इसलिए अभियुक्त जमानत का हकदार है।