वरिष्ठ अधिवक्ता ए एन त्रिपाठी का तर्क था कि बार कार्यकारिणी का कार्यकाल एक साल का है।हर साल एल्डर कमेटी के गठन को लेकर विवाद उठता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और एडवोकेट एसोसिएशन दो अलग संस्थाएं हैं। दोनो का अलग बाई लाज है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार एक वोट का सिद्धांत प्रतिपादित किया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ही हाईकोर्ट से संबद्ध बार एसोसिएशन है। त्रिपाठी का कहना है कि बाई लाज के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने से एक माह पहले वार्षिक सभा बुलाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए।यदि समय से चुनाव नहीं हो पाता तो एल्डर कमेटी की अनुमति से टर्म समाप्ति के बाद एक माह के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।ऐसा नहीं होता तो एसोसिएशन का कार्य एल्डर कमेटी अपने हाथ में लेकर अगले एक माह में चुनाव कराएगी।।
उन्होंने कहा यदि वित्तीय अधिकार जब्त कर लिया जाए तो चुनाव प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाएगी। यह भी कहा लखनऊ पीठ में एसोसिएशन का चुनाव हुआ, गड़बड़ी के कारण हाईकोर्ट के आदेश पर दुबारा होने जा रहा है। यहां पर भी चुनाव कराने में कोई व्यवधान नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता गजेन्द्र प्रताप ने मुख्य न्यायाधीश के सुझाव का स्वागत किया और कहा आपस में बैठकर हल निकाला जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा आपस में बैठकर हल निकाला जाए, अन्यथा कोर्ट आदेश जारी करेगी।
सुनवाई 15 सितंबर को होगी। याचीगण का कहना है कि वर्तमान पदाधिकारियों का कार्यकाल 5अगस्त 21को समाप्त हो चुका है।और वार्षिक आम सभा बुलाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।जो बाईलाज का उल्लंघन है। बार एसोसिएशन 2015-16 में प्रस्ताव पारित कर चुकी है कि बार एसोसिएशन के सदस्य सक्रिय वरिष्ठ अधिवक्ताओं में से वरिष्ठता क्रम में सहमति से एल्डर कमेटी का गठन किया जाएगा।जिसकी अनदेखी कर दूसरे एसोसिएशन के सदस्यों को एल्डर कमेटी में नामित कर बार की मर्यादा व नियमों का उल्लघंन किया गया है।बाईलाज के अनुसार एल्डर कमेटी गठित कर चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए।