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देवकीनंदन ठाकुर बोले- कोरोना ने दुनिया को सिखाया जीने का नया ज्ञान, हर सनातनी की इच्छा, मथुरा में भी बने मंदिर

Mon, 15 Nov 2021 09:59 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज

सार

कथा मर्मज्ञ देवकी नंदन ने संगमनगरी में बहाई ज्ञान-भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी, कहा- हर सनातनी की यही इच्छा, अयोध्या की तरह मथुरा-काशी में भी हो भव्य मंदिर का निर्माण। 
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Prayagraj News : देवकीनंदन ठाकुर। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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पवित्र कार्तिक मास की देवोत्थान एकादशी पर सोमवार को विख्यात कथा मर्मज्ञ देवकीनंदन ठाकुर ने श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ के साथ ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की गंगा बहाई। उन्होंने कोरोना संक्रमण से मिली सीख का अनुसरण करने के साथ ही बेटियों के सम्मान, स्वाभिमान और रक्षा के लिए समाज के हर व्यक्ति से आगे आने की अपील की, साथ ही कहा कि अयोध्या की तरह अब मथुरा में कृष्ण जन्म स्थान और वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ का भी भव्य मंदिर बनना चाहिए। 

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विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के प्रेक्षागृह में दोपहर दो बजे भगवत मंगलाचरण के साथ संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा की शुरुआत हुई तो राधे-राधे के जयघोष से हॉल गूंज उठा। भागवत की भगवान से तुलना करते हुए देवकी नंदन ठाकुर ने कथा के बहाने मौजूदा परिस्थितियों, ज्वलंत मुद्दों और सामाजिक संदर्भों पर भी चर्चा की।

Prayagraj News : देवकीनंदन ठाकुर। - फोटो : प्रयागराज
कोरोनो ने कराया नए ज्ञान का बोध
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण ने दुनिया को नए ज्ञान का बोध करा दिया। कोरोना जीने के सलीके को लेकर इतना बड़ा ज्ञान दे गया, लेकिन फिर भी हम नहीं चेत रहे हैं। अभी अकड़ लोगों को गई नहीं है। यही हाल रहा तो फिर हमसे बड़ा मूर्ख कौन होगा। यह तो बंद आंखें खोलने, नींद से जागने का समय है, लेकिन लोग कोरोना संक्रमण के धीमा पड़ते ही फिर शराब की दुकानों पर भीड़ लगाने लगे हैं।

अनैतिक कार्यों की उसी तरह शुरुआत हो गई है। यही वजह है कि जो लोग कोरोना से किसी तरह बच गए थे, वो अब डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनकर ही भक्त भगवान को प्रसन्न कर सकते हैं।  इस भागवत की कृपा से नि:संतान को संतान, दरिद्र को धन और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए कि भागवत का ही भगवान में वास होता है। शब्द ही ब्रह्म है।
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Prayagraj News : देवकीनंदन ठाकुर की कथा श्रवण करते श्रद्धालु। - फोटो : प्रयागराज
नाम बदलने से वापस हुआ प्रयागराज का गौरव
उन्होंने कहा कि जैसे अयोध्या में भगवान राम की भव्य मंदिर बन रहा है, उसी तरह मथुरा और काशी में भी मंदिर निर्माण जल्द होना चाहिए। यह हर सनातनधर्मी की इच्छा ही नहीं, कामना भी है। उन्होंने याद दिलाया कि कभी प्रयागराज का नाम बदलकर इलाहाबाद कर दिया गया था, लेकिन अब फिर इस नगरी की उस पुराने गौरव की ओर वापसी हो सकी है। यह बहुत बड़े पुण्य का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ही जड़ है। इसलिए उनसे दूर नहीं होना चाहिए। जड़ों से दूर होने वाले कहीं के नहीं रह जाते। 

तीर्थों में मांस-मदिरा पर रोक लगे, बहन-बेटियों के सम्मान के लिए स्वच्छ समाज जरूरी
प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से आग्रह किया कि वह स्वस्थ और सुखी समाज के लिए तीर्थों में मांस-मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए, ताकि घर-परिवार से लेकर समाज तक में शांति और प्रेम की स्थापना हो सके। उन्होंने कहा कि जिस समाज में शराब और मदिरा के चलन होगा और जहां शराबी होंगे, वहां बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं रह सकतीं। जहां नशा होता है, वहां विवेक शून्यता आ जाती है। ऐसे में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के समागम से मिलने वाले विवेक से समाज को नई गति दी जानी चाहिए।
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