Prayagraj News : देवकीनंदन ठाकुर।
- फोटो : प्रयागराज
कोरोनो ने कराया नए ज्ञान का बोध
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण ने दुनिया को नए ज्ञान का बोध करा दिया। कोरोना जीने के सलीके को लेकर इतना बड़ा ज्ञान दे गया, लेकिन फिर भी हम नहीं चेत रहे हैं। अभी अकड़ लोगों को गई नहीं है। यही हाल रहा तो फिर हमसे बड़ा मूर्ख कौन होगा। यह तो बंद आंखें खोलने, नींद से जागने का समय है, लेकिन लोग कोरोना संक्रमण के धीमा पड़ते ही फिर शराब की दुकानों पर भीड़ लगाने लगे हैं।
अनैतिक कार्यों की उसी तरह शुरुआत हो गई है। यही वजह है कि जो लोग कोरोना से किसी तरह बच गए थे, वो अब डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनकर ही भक्त भगवान को प्रसन्न कर सकते हैं। इस भागवत की कृपा से नि:संतान को संतान, दरिद्र को धन और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए कि भागवत का ही भगवान में वास होता है। शब्द ही ब्रह्म है।
Prayagraj News : देवकीनंदन ठाकुर की कथा श्रवण करते श्रद्धालु।
- फोटो : प्रयागराज