घटना में हो गई थी दो लोगों की मौत
आरोप है कि पंचमुखी हनुमान मंदिर पर कब्जा करने के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो गोली चल गई और उस घटना में दो लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य घायल हो गए। एमएलसी ने उसी दिन राजेश्वर भोले बाबा, देव काली मंदिर पर भी कब्जा कर लिया और अपने भाई को महंत बना दिया।
मामले में स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया था और जिला मजिस्ट्रेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून-1980 के तहत निरोधात्मक (नजरबंद) आदेश पारित कर दिया गया। जिला मजिस्ट्रेट ने नजरबंद करने की कार्रवाई की रिपोर्ट को प्रदेश सरकार के पास जनवरी 2021 में भेजा। इसके बाद उसे केंद्र सरकार केपास भेजा गया। जिस पर केंद्र सरकार ने उसे नजरबंद करने की अनुमति दे दी।
अवधि समाप्त होने के बाद नजरबंद रखना गलत- कोर्ट
याची की ओर से तर्क दिया गया कि एनएसए कानून के तहत उसे नजरबंद रखने 12 महीने की अधिकतम सीमा समाप्त हो गई। इसके बावजूद उसे उसी दशा में रखा गया है। जबकि उसने निरोधात्मक कार्रवाई समाप्त करने के खिलाफ औरैया जिला जेल के अधीक्षक के माध्यम से नौ बार अभ्यावेदन जिला मजिस्ट्रेट औरैया और राज्य सरकार के सामने प्रस्तुत किया लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कोर्ट ने इसे गलत माना और कहा कि जब याची की अधिकतम समय तक नजरबंद रखने की अवधि समाप्त हो गई तो उसके बावजूद नजरबंद रखना कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है। उस पर निर्देश जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।