स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के मेडिसिन विभाग के डॉ. मनोज माथुर ने बताया कि इस समय लोगों को सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, गले में संक्रमण, शरीर में दर्द, सिर दर्द, डायरिया, मेनिनजाइटिस, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां तेजी से अपनी आगोश में ले रहीं हैं। ओपीडी मेें पहले की तुलना में ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इनकी संख्या में तीस फीसदी का इजाफा हुआ है। कई लोग गंभीर हालत में चिकित्सालय में पहुंच रहे हैं।
डॉ. माथुर ने बताया कि इस समय एसआरएन में वायरल बुखार के 70 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इसी तहत बेली में 20, कॉल्विन में 15, चिल्ड्रेन अस्पताल में वायरल की चपेट में आए 50 से अधिक बच्चों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। उधर शहर के 10 बड़े निजी अस्पतालों में 95 मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। निजी अस्पतालों के चिकित्सकों के मुताबिक भर्ती होने वाले और ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की ज्यादातर संख्या बाढ़ग्रस्त इलाकों के लोगों की है। संक्रामक रोग नियंत्रण इकाई और मलेरिया विभाग के साथ नगर निगम बाढ़ग्रस्त इलाकों में संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए अभी ठोस अभियान नहीं चला रहा है, जिससे कि मच्छर न पनप सकें और लोग मलेरिया और डेंगू की चपेट में न आए।
जिला मलेरिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक डेंगू के अब तक आ चुके मामलों में पचास फीसदी मरीज बाढ़ग्रस्त इलाकों के हैं, जबकि बाकी मामले जिले भर से आए हैं। पार्षद कमलेश सिंह का कहना है कि जगह-जगह पानी भरा होने से मच्छर पनप रहे हैं, जोकि लोगों को डेंगू, मलेरिया का शिकार बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर घर में लोग जलजनित बीमारियों की चपेट में हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरे इलाके में दवाओं का छिड़काव नहीं करा रहा है।
बच्चे अधिक हो रहे वायरल से संक्रमित
चिल्ड्रेन अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि वायरल के बढ़ते प्रकोप से भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ गई है। एक दिन में 20 से 30 बच्चे भर्ती हो रहे हैं। ओपीडी में भी बुखार, जुकाम, निमोनिया, सांस लेने में तकलीफ, मेनिनजाइटिस, टाइफाइड के मरीज आ रहे हैं। सभी बच्चों को उजरूरत के हिसाब से भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।