लॉकडाउन के बाद परिवार आर्थिक रूप से टूट गया था। टूर्नामेंट की फीस छोड़ो, जूते खरीदने तक के बारे सोचना पड़ता था। यह कहना है सुलेमसराय निवासी बास्केटबॉल खिलाड़ी निशि यादव का।
निशि ने घर की आर्थिक तंगी और समाज की रूढ़ियों को अपने हुनर से ड्रिबल कर मैदान के बाहर का रास्ता दिखा दिया।
17 वर्षीय निशि, एकलव्य स्टेडियम में जूनियर नेशनल बास्केटबॉल कैंप में हिस्सा ले रही हैं। निशि बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। इन्होंने 2025 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
निशि बताती हैं कि पढ़ाई और खेल दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं था ।बास्केटबॉल के खेल ने अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और समय प्रबंधन से परिचित कराया। बीपीएड की पढ़ाई से खेल और शारीरिक शिक्षा को गहराई से समझने का अवसर मिल रहा है। निशि अपनी सफलता के पीछे परिवार और कोचों का महत्वपूर्ण योगदान बताती हैं। इनके पिता शिव प्रसाद यादव इलेक्ट्रीशियन का काम करते हैं।
आर्थिक तंगी में कोच ने दिया साथ
लॉकडाउन के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजरा रहा था। कई बार टूर्नामेंट की फीस जमा करना भी चुनौती बन गई। ऐसे समय में कोच विशाल चंद्रा और अविनाश कुमार ने आर्थिक सहयोग किया।
22 मई से पुडुचेरी में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में करेंगी प्रतिभाग
-निशि यादव 22 से 29 मई तक पुडुचेरी में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेंगी। उनका कहना है कि यह प्रतियोगिता उनके कॅरिअर का बड़ा मंच साबित होगा।
उपलब्धियां
- 2024 में सीबीएसई नेशनल चैंपियनशिप की अंडर-17 श्रेणी में इनकी टीम ने पहला स्थान प्राप्त किया। लुधियाना में 76वीं ओपन जूनियर नेशनल बास्केटबॉल चैंपियनशिप में भी प्रतिभाग किया। निशि तीन बार यूथ स्टेट चैंपियनशिप और तीन बार जूनियर स्टेट चैंपियनशिप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
मेरा हौसला मेरी मां
-निशि ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। मां रमा यादव उनका हौसला बढ़ाती रहती हैं। निशि ने अपने स्कूल की प्रधानाचार्य अमृता अग्रवाल का विशेष आभार जताया। कहा स्कूल से हमेशा पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन सहयोग मिला। अब राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करना है।