नहाय-खाय की परंपरा के साथ शुक्रवार को सूर्योपासना के डाला छठ व्रत की शुरुआत हो गई। इसी के साथ संगम समेत गंगा,यमुना के घाटों पर वेदियां बनाने के लिए व्रतियों और उनके परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी। शनिवार को खरना होगा और रविवार को जल के बीच खड़ी होकर व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य देंगी।
इस चार दिवसीय लोकोत्सव को लेकर हर तरफ उल्लास का माहौल है। शुक्रवार को संगम के अलावा रामघाट, दशाश्वमेध घाट, यमुना के बलुआ घाट, अरैल घाट और झूंसी के तटों पर वेदियां बनाने और अपनी जगह पक्की करने के लिए व्रतियों के परिजनों की भीड़ लगी रही। नहाय-खाय के साथ ही महिलाओं ने व्रत धारण कर लिया।
बाजेगाजे के साथ महिलाएं रविवार को पूजा का डाला सजाकर परिजनों, रिश्तेदारों के साथ तटों पर पहुंचेंगी और मंगलकामना के लिए अर्घ्यदान करेंगी। इसके लिए तटों पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। नगर निगम की ओर से रात्रि प्रवास करने वाली महिलाओं के लिए टेंट की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि महिलाएं छठ पूजा कर उगते सूर्य को तटों पर अर्घ्य दे सकें।