पिछले रविवार की सुबह अधिवक्ता सुमित पांडेय को मार्निग वॉक के दौरान स्टेनली रोड पर गोली मारकर हत्या की कोशिश की वारदात का खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच ने शूटर अरविंद कुमार को उसके भाई समेत गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से घटना में इस्तेमाल दो तमंचा और कारतूस भी बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि करीब एक महीने पहले कैंट इलाके में अपने चचेरे भाई पर फायरिंगमें इन दोनों भाइयों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। मुकदमे से नाम हटाने के लिए इन्होंने वकील सुमित को पैसे दिए थे। काम नहीं होने पर वकील के कत्ल की साजिश रची गई थी। हमले में शूटर अरविंद का एक और साथी शामिल था जो पकड़ में नहीं आ सका है। उसकी तलाश में सोरांव में छापेमारी की जा रही है।
रसूलाबाद स्थित बद्री आवास योजना निवासी अधिवक्ता सुमित पांडेय को तीन जुलाई रविवार की सुबह स्टेनली रोड पर उस वक्त गोली मारी गई थी जब वह टहलने निकले थे। बाइक सवार बदमाशों ने उन पर कई फायर किए थे। गंभीर घायल सुमित को एसआरएन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया था जहां आई जोन आरके चतुर्वेदी ने खुद जाकर उनका फौरन इलाज शुरू कराया था। अब सुमित की हालत सामान्य है। जिला अधिवक्ता संघ में कोषाध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे सुमित के कत्ल की कोशिश से वकीलों में भारी गुस्सा था। गोली किसने मारी? यह रहस्य बना था।
मुकदमा भी अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराया गया था। साथी वकीलों से बातचीत में पुलिस को जानकारी मिली कि राजापुर के अरविंद कुमार और उसके भाई ने एक मुकदमे से नाम हटवाने के लिए सुमित से बात की थी। मगर काम नहीं हो सका। हमले के पीछे इस एंगल पर पुलिस ने जांच की तो सच सामने आ गया। रविवार सुबह क्राइम ब्रांच प्रभारी जेपी राय ने स्वाट टीम प्रभारी नागेश सिंह, एचसीपी जीतेंद्र पाल सिंह, अवधेंद्र तिवारी, रविसेन सिंह, पवन सिंह, अभय कुमार, दीपक सिंह और एसओ शिवकुटी अरविंद त्रिवेदी के साथ तेलियरगंज पेट्रोल पंप के पास घेरकर अरविंद कुमार को उसके भाई प्रहलाद समेत गिरफ्तार कर लिया। उनकी तलाशी में 315 बोर के दो तमंचे और चार कारतूस मिले। एसपी क्राइम रमाकांत प्रसाद ने बताया कि पांच जून को राजापुर में चचेरे भाई बंटू पर फायरिंग में अरविंद और उसके भाई प्रहलाद के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा लिखा गया था। अरविंद ने पूछताछ में बताया कि उसके भाइयों ने मुकदमे से उन दोनों का नाम हटवाने के लिए वकील सुमित पांडेय से बात की थी।
भाइयों ने कहा था कि सुमित से 50 हजार रुपये में बात हुई है। उन्हें 20 हजार रुपये एडवांस दिए गए। बाकी तीस हजार रुपये मुकदमे से नाम निकलने के बाद देना था। अरविंद के मुताबिक कुछ दिन बाद वकील सुमित कहने लगे कि उसे तो इस मामले में जेल जाना पड़ेगा। मुकदमे से केवल उसके भाई प्रहलाद का नाम निकल सकता है। एसपी क्राइम के मुताबिक, अरविंद को शक हो गया कि सुमित उसके भाई को मुकदमे में बचा रहे हैं और उसे जानबूझकर सरेंडर कर जेल जाने के लिए कहा जा रहा है। बस इतनी सी बात पर उसने वकील के कत्ल की ठान ली।
बौखलाए अरविंद ने वकील सुमित की हत्या के लिए सोरांव इलाके के अपने दोस्त रिंकू को भी साजिश में शामिल किया। वे दोनों अक्सर साथ बैठकर गांजा का नशा करते थे। रिंकू ने ही दो तमंचे का इंतजाम किया। वारदात से पहले अरविंद ने एक वकील के जरिए कोर्ट में सरेंडर की अर्जी डाल दी। फिर घटना वाले दिन तीन जुलाई की सुबह उसने रिंकू के साथ बक्शी बांध पर गांजा का नशा किया। इसके बाद वे दोनों बाइक पर नया पूरा के निकट स्टेनली रोड पर जाकर मार्निंग वॉक पर निकले वकील सुमित का इंतजार करने लगे। कुछ देर बाद सुमित दिखे तो उनके पीछे जाकर बाइक रोकी। रिंकू ने पीछे से एक गोली और अरविंद ने सामने से सुमित को दो गोली मारी। फिर वे वहां से भाग गए। अगले दिन अरविंद ने कैंट थाने में दर्ज 307 के मुकदमे में कोर्ट जाकर सरेंडर की कोशिश की लेकिन वकीलों की हड़ताल की वजह से नाकाम रहा।
क्राइम ब्रांच प्रभारी जेपी राय ने बताया कि अरविंद कुमार पर 2004 में राजापुर में अपने चाचा रमेश की फावड़े से काटकर हत्या का आरोप है। रमेश के कत्ल के मुकदमे में फैसला होने वाला है। इसी वजह से उसने कत्ल के गवाह चचेरे भाई बंटू पर पिछले माह फायरिंग की थी।