शांतिपुरम, फाफामऊ में प्रिंसिपल की बेरहमी का वीडियो वायरल होने के बाद स्कूलों में बच्चों की पिटाई और उनके साथ हिंसक बर्ताव एक बार फिर से चर्चा में है। रुद्र प्रयाग विद्या मंदिर स्कूल में बच्चों की पिटाई के मामले से पहले भी ऐसी ही कई घटनाएं शहर का ध्यान खींच चुकी हैं। इसमें सबसे चर्चित हालिया की सेंट जोसेफ स्कूल की घटना रही। जिसमें वाइस प्रिंसिपल की पिटाई से बच्चे की आंख पर चोट आई और अभी तक उसका इलाज हो रहा है। स्कूलों में बच्चों से निर्ममता नई बात नहीं। हैरत यह कि हर बार मामला बातचीत कर आपस में ही सुलझा लिया जाता है। नतीजा पीड़ित बच्चों को स्कूल शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि यातना गृह जैसा नजर आता है। देहात के स्कूलों में तो और भी बदतर स्थिति है, जहां पढ़ाई के लिए पिटाई को अनिवार्य माना जाता है।
सेंट जोसेफ स्कूल का मामला कई दिनों तक सुर्खियों में रहा। स्कूल में वाइस प्रिंसिपल लेसिली कुटीनो की पिटाई ने एक छात्र की आंख ही खराब कर दी। जब यह मामला उछला तब भी स्कूल का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। किसी कार्रवाई के बजाय कुटीनो का ही बचाव किया जाता रहा। घटना को दुर्घटना बताया जाता रहा। उधर छात्र के घरवाले पुलिस और प्रशासन की ड्योढ़ी पर गुहार लगाते रहे। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। आखिरकार कुटीनो को उनके पद से हटाया गया लेकिन इस सारी प्रक्रिया में करीब दो महीने का समय लगा। इससे पता चलता है कि बच्चों के साथ हिंसक रवैये के प्रति स्कूलों का मनोदशा कैसी है। हर बार टीचर का ही बचाव किया जाता है।
गांव-देहात के स्कूलों की दशा इससे भी खराब है। रोज ही ऐसे प्रकरण सामने आते हैं और अगले ही दिन इन्हें दबा दिया जाता है। इसका कारण कहीं न कहीं अभिभाव भी हैं, जो यह समझते हैं कि पिटाई बिना पढ़ाई नहीं हो सकती। उनकी इस सोच के चलते कई शिक्षक बच्चों पर अपनी कुंडा निकालते हैं। चूंकि घर में कोई सुनवाई नहीं होती, सो बच्चे अपने साथ हो रहे हिंसक बर्ताव को बर्दाश्त करते रहते हैं।
रुद्र प्रयाग विद्या मंदिर में भी यही हुआ। बताते हैं कि बच्चों की पिटाई नई बात नहीं। बताते हैं कि प्रिंसिपल सत्येंद्र द्विवेदी रोज ही बच्चों के साथ ऐसे ही पेश आते हैं। प्रिंसिपल की बेरहमी शायद कभी लोगों को पता नहीं चलती, अगर स्कूल के ही एक शिक्षक ने इसका वीडियो न बना लिया होता। चार दिन पहले भी बच्चों को उनकी किसी गलती के लिए लाइन में खड़ा कर पीटा जा रहा था, और इसी दौरान इसका वीडियो बना लिया गया। पहले छड़ी और फिर लाठी से पिटाई के चलते एक बच्चे की हालत बिगड़ी तब जाकर मामला पुलिस के पास पहुंचा। मगर फाफामऊ पुलिस चौकी पर समझौता करा दिया गया। पुलिस को समझ में नहीं आया कि ऐसा करने से मासूमों को रोज ही ऐसी बेरहमी झेलनी पड़ेगी।