सर्पदंश से एक बच्चे की जान चली गई। मगर मां-बाप की आस नहीं टूटी। अंधविश्वास के चलते परिजन शव लेकर दो दिन तक झाड़ फूंक कराते रहे। मगर जब किशोर जिंदा नहीं हुआ तो भी उन्होंने आस नहीं छोड़ी। तांत्रिक भी हार मानने को तैयार नहीं हुए। लिहाजा उनके कहने पर शव केले के पत्ते में लपेट कर गंगा में प्रवाहित कर दिया गया। इस बारे में तांत्रिकों का तर्क है कि गंगा में प्रवाहित शव पर अगर किसी अच्छे तांत्रिक की नजर पड़ेगी तो वह जिंदा कर देगा। परिजनों ने शव के साथ किशोर का नाम पता और मोबाइल नंबर भी लेमिनेशन कराकर गले में बांध दिया है। उन्होंने जिंदा करने वाले तांत्रिक को पचास हजार का इनाम देने की भी घोषणा की है।
बहरिया विकास खंड के बलीपुर गांव के विजय कुमार की दो संतानें थीं। पहली बेटी प्रिया 9 वर्ष की दूसरा बेटा प्रियांशु 7 वर्ष का था। रविवार को प्रियांशु को जहरीले सांप ने डस लिया। परिजनों को जानकारी हुई तो उसको भानेमऊ गांव स्थित मजार पर ले गए। करीब तीन चार घंटे तक वहां इलाज चला लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इसके बाद वे फूलपुर स्थित एक नर्सिंगहोम ले गए। वहां से जवाब मिलने पर परिजन प्रियांशु को लेकर एसआरएन पहुंचे। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद भी प्रियांशु का शव लेकर परिजन कई तांत्रिकों के पास गए और झाड़ फूंक कराया। मगर कोई फायदा नहीं हुआ। सोमवार देर शाम तक घर पर भी झाड़ फूंक होती रही। परिजन न आस छोड़ने को तैयार थे और न ही तांत्रिक हार मानने को। बाद में तांत्रिकाें के कहने पर परिजनों ने शव केले के पत्ते में लपेट कर गंगा में प्रवाहित कर दिया। परिजनों का कहना है कि सोमवार देर शाम किसी तांत्रिक ने फोन कर बताया है कि उसने शव पकड़ लिया है और बच्चे को जिंदा कर देगा।