फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपना बच्चा नहीं रहा तो चुराया सोनी का दुलारा

Thu, 15 Jun 2017 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
अपने बच्चे की मौत की गम में डूबी करुणा ने ऐसा अपराध कर दिया, जिसने पुलिस से लेकर पब्लिक तक सभी को हिला दिया। उसने बताया कि वह मायके में थी तभी उसका दो माह का बच्चा चल बसा। मगर सास ने कह दिया था कि अबकी ससुराल आना तो बेटा गोद में होना चाहिए। इसी वजह से मायके से ससुराल जाते समय उसने इलाहाबाद जंक्शन पर मां की गोद से बच्चा चुरा लिया। अपनी दिक्कत के आगे वह बच्चे की मां की व्यथा का ख्याल नहीं कर सकी।
विज्ञापन


एसपी रेलवे इलाहाबाद दीपक भटट ने बताया कि करुणा महाराष्ट्र में थाणे जिले की रहने वाली है। उसका पहला ब्याह थाणे में ही विजय से हुआ था। उससे एक बेटा भी है। विजय ने उसे छोड़ दिया लेकिन बेटा अपने पास ही रखा। करीब आठ साल पहले करुणा एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करती थी तभी साथी कर्मचारी जौनपुर के पिंटू कुमार से उसका मिलना हुआ। जल्द ही उन्होंने शादी कर ली। करुणा ने बेटी को जन्म दिया जो अब सात साल की है। मगर उसकी सास कहती थी कि उसे बेटा चाहिए। तीन साल पहले पिंटू जौनपुर आ गया और यहां बाइक सर्विस और पंक्चर बनाने की दुकान खोल ली।

पिछले साल गर्भवती होने के बाद करुणा अपने मायके चली गई थी। वहां उसने चार माह पहले बेटे को जन्म दिया। मगर दो महीने बाद ही बच्चे की बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई। उसने बेटे की मौत की बात सास से छिपा ली थी। सास बार-बार कहती थी कि बेटे को लेकर ससुराल आओ। उसने बहाना किया कि गर्मी में बेटा यूपी में परेशान होगा इसलिए उसे मायके में छोड़कर आएगी। मगर सास ने साफ कह दिया कि ससुराल में कदम तभी रखना जब बेटा गोद में होगा। वरना मायके में ही रहो, बिना बेटे के आने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन


इसी वजह से करुणा के मन में बच्चा चोरी का ख्याल आया। वह 27 मई को मुंबई से बेटी के साथ इलाहाबाद रवाना हुई। दूसरे रोज साकेत एक्सप्रेस से जंक्शन पर उतरी और बेटी को लेकर जौनपुर पहुंची। मगर सास की धमकी की वजह से वह ससुराल नहीं गई बल्कि बेटी को घर भेजकर वापस इलाहाबाद आ गई। यहां वह 29 मई से चार जून तक बच्चा चोरी के लिए भटकती रही। उसे कुछ ही महीने का बच्चा चाहिए था जिसे वह ससुराल ले जाकर अपना बता सके। इस चक्कर में पैसे नहीं रहे तो पेट भरने के लिए उसने भीख भी मांगी। चार जून की शाम उसने जंक्शन के वेटिंग हॉल में सोनी की गोद में पांच माह के कुलदीप को देखा तो ठान लिया कि उसे उठाकर ले जाएगी। एक बार रात करीब नौ बजे वह सोनी के पास आकर बैठी थी। वह जग रही थी। इसलिए दूर जाकर उसके सोने का इंतजार करने लगी।

-सोनी की गोद से रात पौने दो बजे बच्चा चुराने के बाद वह तेज कदमों से फुटओवर ब्रिज पारकर सिविल लाइंस साइड चली गई। पकड़े जाने का डर था इसलिए उसने स्टेशन पर भदोही की ट्रेन का इंतजार करने की बजाय दारागंज जाने का फैसला किया। पैसे थे नहीं इसलिए रिक्शा या ऑटो नहीं कर सकी और इतनी रात में करीब सात किलोमीटर दूर दारागंज रेलवे स्टेशन तक पैदल ही गई। तीन बजे वह लिच्छवी एक्सप्रेस से ज्ञानपुर स्टेशन पहुंच फिर टेंपो में बैठ ससुराल गई। ससुराल जाकर उसने सबको उसे अपना बेटा गोलू बताया। हालांकि सास ने शक जताया कि बच्चा तो एकदम गोरा है जबकि तो वह तो काली है।

-चार जून से बच्चे की बरामदगी में रात-दिन मेहनत करते रहे जीआरपी थाना प्रभारी मनोज सिंह ने बताया कि उन्हें तीसरे रोज दारागंज स्टेशन पर चाय बेचने वाले ने व्यक्ति ने सुराग दिया। उसने स्टेशन पर बच्चा चोर महिला का पोस्टर देखा तो उन्हें फोन किया और कहा कि यह महिला दारागंज स्टेशन पर बच्चे को लेकर आई थी। इंस्पेक्टर ने उसे बुलाकर बात की। चाय विक्रेता ने बताया कि पोस्टर वाली महिला ही चार-पांच जून की रात करीब तीन बजे स्टेशन पहुंची तो उसकी गोद में बच्चा रो रहा था। उसने कहा कि दूध पिला दो तो वह बोली कि कुछ खाया नहीं इसलिए दूध नहीं निकल रहा।

उसने महिला को चाय पीने को दी। महिला ने बताया था कि वह ज्ञानपुर स्टेशन पर उतरकर अपने गांव जाएगी। इंस्पेक्टर मनोज सिंह ने अहम सूचना देने पर पांच सौ रुपये का ईनाम देकर भदोही में खोजबीन शुरू कर दी। इसी दौरान तीन रोज पहले एक फोन भदोही में ज्ञानपुर से आया। फोन करने वाले ने बताया कि ज्ञानपुर स्टेशन के पास पकौडी बेचने वाले ने जानकारी दी कि उसने इस महिला को गोद में बच्चा लेकर टेंपो में बैठते देखा था। इतना ही नहीं, महिला ने पकौड़े बेचने वाले से मोबाइल लेकर किसी को फोन किया था। फिर क्या था। इस सूचना ने बच्चे की तलाश में भटक रही पुलिस को महिला के और करीब ला दिया। पुलिस ने सर्विलांस का सहारा लिया। पकौड़ा विक्रेता से भी जाकर बात की। महिला ने उसके मोबाइल से जौनपुर के सुरेरी इलाके में एक नंबर पर पांच मिनट से ज्यादा बात की थी। पुलिस ने उस नंबर की लोकेशन ट्रेस की और सुरेरी इलाके में गांव-गांव तलाशी अभियान चलाया और पोस्टर भी चिपका दिए। मंगलवार को महिला की ठोस जानकारी मिली तो जीआरपी टीम बच्चा बरामद कर महिला को गिरफ्तार कर लिया।

सीधी जनपद से अमृतसर जाने के लिए जंक्शन पर चार जून की रात पति राम सिंह चौहान के साथ ट्रेन की इंतजार में बैठी सोनी की गोद से मासूम कुलदीप के चोरी होने के बाद से रेलवे पुलिस अफसर से लेकर सिपाही तक परेशान थे। एसपी रेलवे दीपक भट्ट खुद दिन में कई बार तलाशी अभियान के बारे में पूछते और सलाह देते। इंस्पेक्टर मनोज सिंह ने कई टीम गठित की जिसे अलग-अलग जनपदों में भेजा। खुद वह फतेहपुर से भदोही और वाराणसी तक खोजबीन में गए। इस दौरान बच्चा चोर महिला के हुलिए वाली छह महिलाओं को फतेहपुर, वाराणसी समेत दूसरे जनपदों से बुलाकर पूछा गया। मगर असली महिला नहीं मिल रही थी। मंगलवार को कामयाबी मिली तो सब खुशी से झूम उठे। बच्चे को लेकर टीम जीआरपी थाने पहुंची तो पुलिसवाले बच्चे को गोद में लेकर नाचने-गाने लगे। लड्डू बांटा गया। इंस्पेक्टर को फूलों की माला पहनाकर अभिनंदन किया गया। बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में एसपी दीपक भट्ट अपनी खुशी नहीं छिपा पा रहे थे।

अपना लाडला बेटा पाकर सोनी खुशी से फूली नहीं समा रही थी। बच्चे को गोद में लेते ही पहले वह देर तक उसे चूमते हुए रोती रही। फिर उसे दूध पिलाकर पुचकारती और दुलारती रही। पिता राम भी बार-बार बेटे के सिर पर हाथ फेरता। उसकी भी आंखों से खुशी के आंसू गिर रहे थे। बुधवार को रेलवे पुलिस मुख्यालय में एसपी दीपक भट्ट के सामने मां सोनी ने कहा कि बेटा चोरी होने के बाद से उसका कलेजा फटा जा रहा था। उसकी तो दुनिया में अंधेरा ही छा गया। लगा अब क्या जीना। पति जबरन कुछ खिलाते और पानी पिलाते रहते। मैंने तो कह दिया था कि बिना बेटा लिए रेलवे स्टेशन से नहीं जाऊंगी। एसपी और इंस्पेक्टर साहब ने दिलासा दिया था कि मुझे मेरा बच्चा वापस दिलाने में कोई कसर नहीं छोंड़ेंगे। सोनी ने बताया कि पुलिस बच्चे को खोज रही थी और वह मंदिर-दरगाज पर जाकर प्रार्थना कर रही थी कि कुलदीप मिल जाए वरना वह जी नहीं सकेगी। सोनी ने कहा-भगवान ने मेरी सुन ली। रेलवे पुलिस ने मुझे दूसरी जिंदगी दे ही है।

-चोरी गए बच्चे की सुरक्षित बरामदगी पर एडीजी रेलवे, आईजी रेलवे और एसपी रेलवे ने जीआरपी टीम में शामिल इंस्पेक्टर मनोज सिंह, एसएसआई कैलाशपति सिंह, सब इंस्पेक्टर अंजनी सिंह, विनोद कुमार मौर्या, सुबोध कुमार, राजेश कुमार, सिपाही अकबर खां, सतपाल बिंद, हरिश्चंद्र भाष्कर, अरविंद सिंह, अमित कुमार, विपुल राय, अतुल सिंह, भूप सिंह यादव, आशीष कुमार, महिला सिपाही इंद्रावती की मेहनत की सराहना की, साथ ही नगद पुरस्कार भी देने का ऐलान किया। साथ ही एसपी ने लापरवाही में निलंबित सिपाहियों इखलाक और अशोक की बहाली भी कर दी।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें