मथुरा के जवाहर बाग कांड के मुख्य अभियुक्त और घटना में मारे गए रामवृक्ष यादव की मौत पर संदेह है। घटना में मारा गया व्यक्ति रामवृक्ष ही था अथवा किसी और को पुलिस रामवृक्ष बता रही है, इसकी वैधानिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर कई याचिकाएं दाखिल हैं। बुधवार को याचिका पर सुनवाई प्रारंभ हुई तो याची के अधिवक्ताओं ने रामवृक्ष की मौत का मामला उठाया।
याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि रामवृक्ष और उसके परिवार के लोगों की डीएनए रिपोर्ट कब तक मिल सकेगी। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि रिपोर्ट मिलने में इतना विलंब क्यों रहा है, जबकि डीएनए टेस्ट लैब लखनऊ सहित कई शहरों में भी है। अदालत इस तथ्य पर विचार कर रही है कि पुलिस की जांच क्या सही दिशा में चल रही है और क्या मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की आवश्यकता है।
याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता राजीव लोचन शुक्ला ने कहा कि जवाहर बाग ऑपरेशन में शामिल रहे छह अधिकारी जिनमें घायल भी शामिल हैं, का अब तक पुलिस ने बयान दर्ज नहीं किया है। इन अधिकारियों से पूछताछ न होने से पुलिस पर मामला दबाने का आरोप लग रहा है। अदालत ने जानना चाहा कि यदि जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी तो क्या फर्क पड़ेगा और बयान लेने में देरी से मुकदमे के विचारण पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा कि याची के अधिवक्ता अपनी बहस लिखित रूप में दाखिल करें ताकि सरकार उसकी जांच कर अपना पक्ष रख सके। सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी।
जवाहर बांग कांड में शहीद हुए एडिशनल एसपी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ने भी याचिका में अर्जी दाखिल कर पक्ष सुने जाने की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी मिश्र ने उनकी ओर से अर्जी दाखिल कर याची बनाए जाने की मांग की इस पर कोर्ट ने कहा कि पहले से छह याचिकाएं दाखिल हैं जिनपर सुनवाई चल रही है। वह चाहें तो इंटरवीनर बन सकते हैं। वीसी मिश्र ने बताया कि यह पूरा मामला राजनितिक है और इसी कारण से इसे दबाया जा रहा है। वह अदालत के सामने इन तथ्यों को उजागर करेंगे।