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राजा शंकरगढ़ से जुड़ी मूल पत्रावली गायब

Wed, 20 Jul 2016 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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धोखा - फोटो : demo pic
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फर्जीवाड़ा कर राजा शंकरगढ़ की जमीन बेचे जाने के बाद एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। बारा तहसील से राजा शंकरगढ़ से जुड़ी मूल पत्रावली ही गायब हो गई है। तहसीलदार न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान जब पत्रावली की जरूरत पड़ी तो यह मामला सामने आया। अब फाइल खोजी जा रही है। मामले में पत्रावली प्राप्त करने वाले तत्कालीन पेशकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने की तैयारी है। साथ ही तहसीलदार ने उन लोगों को भी विधिक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया है, जिन पर फर्जीवाड़ा कर राजा शंकरगढ़ की जमीन बेचे जाने का आरोप है।
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तथ्यों के मुताबिक शंकरगढ़ के राजा कमलाकर सिंह के दो पुत्र ज्ञानेंद्र सिंह और महेंद्र सिंह थे। ज्ञानेंद्र की कोई संतान नहीं थी। बाद में उनकी मौत हो गई। महेंद्र के एक पुत्र शिवेंद्र सिंह और बड़ी पुत्री अपर्णा हैं। कुछ दिन पहले तहसील दिवस और थाना दिवस में शिकायत दर्ज कराई गई कि फर्जी वसीयतनामा के जरिये राजा शंकरगढ़ की मसुरियन माई मेले की 22 बीघा जमीन अशोक नगर में हेस्टिंग रोड निवासी अपर्णा के नाम कर दी। बाद में अपर्णा ने यह जमीन गलत तरीके से अपने भाई शिवेंद्र के नाम कर दी।

नियमत: जीवित रहते वसीयतनामा नहीं हो सकता लेकिन अपर्णा ने जीवित रहते हुए अपने भाई के नाम वसीयत कर दी और शिवेंद्र ने जमीन किसी तीसरे व्यक्ति को बेच भी दी। तीसरा व्यक्ति अब वहां निर्माण करा रहा है और इस कारण मौके पर तनाव की स्थिति है। मसुरिया माई मंदिर के  सामने निर्माण होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है और इससे कानून व्यवस्था भी बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। जांच में मामला सही पाए जाने पर तहसीलदार बारा राम कुमार शुक्ला ने जमीन के क्रय-विक्रय और वहां निर्माण पर अंतरिम आदेश के तहत रोक लगा दी और अपर्णा एवं शिवेंद्र को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया।
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इस बीच जांच आगे बढ़ाई गई तो नया मामला सामने आ गया। राजा शंकरगढ़ की जमीन से संबंधित मूल पत्रावली तहसील परिसर से गायब हो गई है। तहसीलदार ने पेशकार को फाइल खोजने के निर्देश दिए हैं। मामले में उस तत्कालीन पेशकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने की तैयारी हो रही है, जिसने मूल पत्रावली प्राप्त की थी। इसके साथ ही तहसीलदार बारा ने अपर्णा को नोटिस जारी कर कहा है कि उनके पास कोई प्रमाण या साक्ष्य है तो खुद अथवा अधिवक्ता के माध्यम से 28 जुलाई तक उनके न्यायालय में प्रस्तुत करें। अगर वे अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं करती हैं तो माना जाएगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है और तब जमीन राज्य सरकार में निहित कर दी जाएगी। साथ ही इसे आपराधिक मामला मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
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