चेक बाउंस मामले में विशेष अदालत ने दोषी को दो साल के साधारण कारावास और चेक की धनराशि की दोगुनी रकम बतौर अर्थदंड जमा करने की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त न्यायालय (एन.आई.एक्ट) पीठासीन अधिकारी डॉ. बालमुकुंद की कोर्ट ने सुनाया है। मामला आरके डिस्ट्रीब्यूटर्स के पार्टनर राहुल गुप्ता की ओर से कोरांव निवासी धर्मराज सिंह और देवराज सिंह के खिलाफ दाखिल परिवाद से जुड़ा है।
परिवादी के अनुसार ट्रैक्टर के कारोबार के सिलसिले में 3,79,085 रुपये की धनराशि बकाया थी। इसके भुगतान के लिए पांच अक्तूबर 2007 को भारतीय स्टेट बैंक, मेजा शाखा का चेक दिया गया था। चेक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया लेकिन 16 नवंबर 2007 को चेक बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया।
परिवादी के अधिवक्ता संदीप मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चेक पर विपक्षियों के हस्ताक्षर है। बैंक में चेक बाउंस हो गया है। ऐसे में विपक्षी एनआई एक्ट का दोषी है।कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर विपक्षी को चेक बाउंस मामले में दोषी करार देते हुए दो साल के साधारण कारावास और दोगुनी राशि 7,58,170 रुपये देने का आदेश दिया।
अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि प्रतिकर के रूप में अदा की जाएगी। अर्थदंड तत्काल जमा करने पर दोषी को अभिरक्षा से मुक्त कर दिया जाएगा, जबकि भुगतान नहीं करने पर उसे तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, एक और चेक बाउंस मामले में धर्मराज सिंह को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और चेक धनराशि 3,63,302 रुपये का दो गुना 7,26,604 रुपये का अर्थदंड लगाया।