फूलपुर कस्बे में बुधवार दोपहर बस की चपेट में आकर छात्र अरमान, अब्दुल्ला और रोहित की मौत से मातम छाया है। गांव के लोग अनहोनी की इस घटना से सदमे में है। स्थानीय लोग छात्रों के बीच गहरी दोस्ती की चर्चा करते रहे। तीन साल पहले उन्होंने एक साथ नौवीं कक्षा में दाखिला लिया था। इसके बाद से तीनों गहरे दोस्त बन गए थे। उनके घर भी पास थे, जिसके चलते स्कूल के अलावा भी उनका दिन में कई बार मिलना-जुलना होता था। वे कहीं भी जाते थे तो एक साथ। खेलना, पढ़ना और घूमना कुछ भी।
अरमान और अब्दुल्ला के पिता सऊदी अरब में रहकर नौकरी करते हैं। वे इस समय भी सऊदी में हैं। काफी देर तक उनके घरवालों ने हादसे में बेटे के मौत की जानकारी नहीं दी। दुर्घटना की खबर पाकर क स्बे में ही कपड़ा की दुकान चलाने वाले गुलाब जायसवाल पहुंचे तो बेटे रोहित और उसके दो दोस्तों का खून से लथपथ शव देखकर बिलख पड़े।
छात्र अरमान सराय मार्ग फूलपुर के अफताब अहदम और बीबी तरन्नुम का इकलौता बेटा था। उसकी मौत से घर का चिराग बुझ गया। इकलौती संतान होने के चलते वह मां-बाप का लाडला था। घरवाले उसकी हर ख्वाहिश पूरी करते थे। बेटे के मौत की खबर सुनकर घटनास्थल पर पहुंची मां तरन्नुम उसका शव देखकर अचेत हो गई।
पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। वहीं रोहित तीन भाइयों में बड़ा था। उसकी मौत से मां ऊषा और दोनों छोटे भाइयों मोहित और निखिल का रोकर बुरा हाल है। हादसे का शिकार तीसरा छात्र अब्दुल्ला पांच भाई और दो बहनों में बड़ा था। बेटे अब्दुल्ला की मौत से आयशा की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। देर रात पोस्टमार्टम के बाद अब्दुल्ला और अरमान का शव घर ले जाया गया। जबकि रोहित के शव का रसूलाबाद घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अरमान, रोहित और अब्दुल्ला बाइक पर तीन सवारी तो थे ही, बाइक चालक ने हेलमेट भी नहीं पहना था। नाबालिग होने के बाद भी वे अक्सर बाइक से स्कूल जाते थे। घरवाले और स्कूल प्रशासन के लोग इस पर ध्यान देते तो शायद तीन छात्रों की जान नहीं जाती। हादसे के बाद लोग यह चर्चा कर रहे थे कि छात्रों का पैर भी ठीक से जमीन पर नहीं पहुंचता था लेकिन वे बाइक चलाते थे।