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मामूली विवाद में पिता को थाने में बैठाया, मासूम ने तोड़ा दम

Sun, 07 Aug 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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क्राइम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शुक्रवार को करेली पुलिस के क्रिया-कलाप ने मानवता को शर्मसार कर दिया। गंभीर रूप से बीमार पांच साल की बच्ची के पिता को कर्तव्यनिष्ठ पुलिस ने मामूली विवाद में दिन भर थाने में बैठाये रखा। इसका बेहद दुखद परिणाम यह हुआ कि इलाज के अभाव में मासूम ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। घटना से नाराज मोहल्ले के लोग परिजनों के साथ बच्ची का शव लेकर शनिवार सुबह करबला चौराहे पर आ गए। सूचना पर करेली पुलिस पहुंची। पुलिस ने समझाबुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं थे। मामला बढ़ता देख पुलिस ने शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। 
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बेनीगंज का सुधीर कुमार पटरा-बल्ली का काम करता है। वह अपनी सास मीना की दी हुई जमीन पर मकान बनाकर परिवार सहित रहता है। मीना ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा दूसरे को बेच दिया। इससे सुधीर सास से खुन्नस खाए हुए था। जमीन के खरीदार कब्जा करने पहुंचते तो सुधीर उनसे विवाद करता था। शुक्रवार शाम को भी सुधीर का जमीन के क्रेता से विवाद होने लगा तो सास मीना ने सौ नंबर फोन कर पुलिस बुला ली। पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को करेली थाने पर बुलाया। सुधीर और विपक्षी थाने पहुंच गए। इधर सुधीर की बेटी राधिका (5) घर में बीमार पड़ी थी।

उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। लेकिन पिता के थाने में होने के चलते उसे अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। रात में पिता थाने से समझौता कर घर पहुंचा तो बेटी को लेकर कॉल्विन अस्पताल भागा। कॉल्विन से चिल्ड्रेन अस्पताल ले गए जहां देररात राधिका की मौत हो गई। परिजन बिना पोस्टमार्टम शव घर ले जाने लगे तो डॉक्टरों ने विरोध किया। हंगामा होेने लगा तो कर्नलगंज पुलिस पहुंची। तब परिजन शव लेकर बेनीगंज स्थित घर पहुंचे।
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शनिवार सुबह लगभग सात सुधीर बेटी का शव लेकर मोहल्ले के लोगों के साथ करबला चौराहे पर आ गया। वह पुलिस पर आरोप लगाने लगा कि उसे थाने न ले गए होते तो बेटी को इलाज मिल जाता और उसकी मौत न होती। सूचना पर सीओ और कई थानों की फोर्स पहुंची। तब जाकर मामला शांत हुआ। परिजन बिना पोस्टमार्टम ही शव का अंतिम संस्कार करना चाहते थे। पुलिस ने पंचनामे के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मामले में एसओ आनंद पांडेय के अनुसार दोनों पक्ष खुद थाने आए थे और समझौता कर गए। पुलिस उसे पकड़कर नहीं ले गई थी। 
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