नैनी जेल के सामने फायरिंग में घायल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
सेंट्रल जेल नैनी के गेट पर रविवार शाम दो सफारी में सवार दर्जन भर लोगों को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग की गई। तीन बाइक पर आए बदमाशों ने ताबड़तोड़ बम भी चलाए। इसमें सफारी सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि करीब छह लोग घायल हो गए। इसमें चार की हालत नाजुक बनी है। वारदात की वजह झूंसी के दो गुटों के बीच एक दशक से चल रही वर्चस्व की लड़ाई बताई जा रही है। सफारी सवार नैनी जेल में बंद हत्यारोपी से मिलकर निकले ही थे कि पहले से घात लगाए बदमाशों ने हमला बोल दिया। दर्जनों राउंड फायरिंग और बमबाजी से पूरा इलाका दहल उठा। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश असलहा लहराते हुए खरकौनी गांव की ओर भाग निकले। सूचना पाकर डीआईजी, एसएसपी और नैनी कोतवाली पुलिस समेत अन्य आलाधिकारी और कई थानों की फोर्स पहुंच गई। बदमाशों की तलाश में घेरेबंदी की गई। पुलिस कोे घटनास्थल से कई क ारतूस, खोखे और असलहे मिले हैं, जिन्हें कब्जे में लिया गया है।
झूंसी में शेरडीह के रहने वाले चंद्रभान यादव उर्फ बाबा पूर्व प्रधान का गांव के पारसनाथ यादव से कछार में जमीन को लेकर एक दशक से विवाद चल रहा है। इसके साथ ही दोनों पक्षों में प्रधानी चुनाव को भी लेकर तनाव बना हुआ था। क्षेत्र में दबदबे को लेकर भी दोनों गुटों रंजिश रहती थी। इसी के साथ दोनों पक्षों में जमीन की डीलिंग को लेकर भी झड़पें आम थीं। इसी तनातनी में चंद्रभान को एक बार दूसरे गुट के लोगों ने गांव में काफी अपमानित किया था। इसका बदला लेने के लिए चंद्रभान ने पारसनाथ के बेटे तत्कालीन ग्राम प्रधान योगेंद्र उर्फ बच्चा यादव की 10 जुलाई 2005 को गोली मारकर हत्या कर दी थी।
जिसमें चंद्रभान यादव और उसके चार बेटे राजेश यादव, राजकुमार यादव, संतोष यादव और ज्ञानचंद्र उर्फ वकील यादव नामजद थे। 2008 में पारसनाथ यादव के एक और बेटे धर्मेंद्र की हत्या कर दी गई। इस मामले में भी चंद्रभान और उसके बेटों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। योगेंद्र की हत्या में चंद्रभान यादव और उसका बेटा राजकुमार यादव नैनी केंद्रीय कारागार में सजा काट रहे हैं। रविवार दोपहर चंद्रभान का बेटा ज्ञानचंद्र दो सफारी मेें एक दर्जन समर्थकों के साथ पिता और भाई से मिलने पहुंचा। जेल में मुलाकात के बाद सभी गाड़ी में बैठकर जैसे ही चलेे, नेहरू द्वार के बाहर तीन अपाचे बाइक से आए सात बदमाशों ने उन्हें घेरकर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। बमों से भी ताबड़तोड़ हमले किए गए। बदमाशों ने तकरीबन 50 राउंड फायरिंग की और एक दर्जन बम चलाए। सफारी में सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बताया जाता है कि सफारी सवार लोगों ने भी जवाब में फायरिंग की लेकिन पुलिस इंकार कर रही है। तांडव मचाने के बाद बदमाश खरकौनी की ओर असलहा लहराते हुए भाग निकले। हमलावरों के भागने के कुछ देर बाद ही पुलिस पहुंची।
सफारी में ज्ञानचंद्र उर्फ वकील (25), लालता प्रसाद (65) मृत पड़े थे। जबकि श्रीकांत (30) पुत्र छोटे लाल, अनिल यादव (20), शत्रुबदन (47) पुत्र जोखूलाल, सुरेश यादव (30) पुत्र गुलाब यादव, जयप्रकाश यादव और अनिल उर्फ सोनू खून से लथपथ पड़े थे। आनन-फानन में पुलिस घायलों को एसआरएन अस्पताल ले गई। शत्रुबदन और सुरेश यादव के सीने में गोली लगी है। उनकी हालत नाजुक बनी है। उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। श्रीकांत और अनिल कुमार यादव की हालत भी गंभीर है, इन्हें एसआरएन अस्पताल में ही रखा गया है। बाकी घायलों का भी यहीं इलाज चल रहा है। घटना के बाद डीआईजी जेके शाही, एसएसपी जोगेंद्र कुमार, एसपी यमुनापार एके राय, सीओ करछना बृजनंदन राय समेत कई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस को सड़क पर ही पिस्टल, रायफल, कारतूस और खोखे मिले हैं। पुलिस ने हमलावरों की तलाश में घेरेबंदी की लेकिन तत्काल कोई सफलता नहीं मिली।