यमुनापार में कोरांव के भरथीपुर गांव में बुधवार रात नीचे तक लटके 11 हजार वोल्ट का तार बारात में डीजे रोड लाइट से छू गया। इससे बैंड में शामिल दो कर्मचारियों और बाराती की मौत हो गई। छह लोग करेंट की चपेट में आकर जख्मी हुए, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। इस घटना से शादी समारोह और गांव में खलबली मच गई। बिजली विभाग की लापरवाही से हुई इस अनहोनी से लोगों में गुस्से को देखते हुए अफसर पहुंचे और मुआवजे का ऐलान किया।
भरथीपुर गांव निवासी तेरसू प्रसाद गुप्ता की बेटी पूनम का ब्याह बुधवार को मिर्जापुर में हलिया के भैरव गुप्ता के साथ था। रात में मिर्जापुर से बारात गांव पहुंची। सभी बाराती डीजे पर बज रहे गानों पर डांस करते हुए दुल्हन के घर पहुंचे। तभी अचानक एक मजदूर के सिर पर रखी रोड लाइट नीचे तक लटके 11 हजार वोल्टेज के तार से छू गई। करंट की चपेट में आने से बड़ोखर निवासी दो मजदूर नीरज आदिवासी (21) और विंध्यवासिनी आदिवासी (40) तथा बाराती जगदीश प्रसाद गुप्ता (30) समेत कई लोग गिरकर तड़पने लगे।
बारातियों में खलबली मच गई। दोनों मजदूरों तथा बाराती जगदीश की मौत हो गई। जगदीश प्रतापगढ़ लालगंज में दिघुली गांव के रहने वाले थे। इन तीनों की मौत के अलावा बड़ोखर का जीतलाल (35), अर्जुन (26), भरथीपुर गांव का गोपीचंद्र (24) भी झुलस गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। तीन अन्य लोगों को हल्की चोट पहुंची। रात में ही जगदीश का शव उनके घर ले जाया गया। घटना के बाद कोरांव थाना प्रभारी कृष्णपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
बृहस्पतिवार सुबह एसडीएम कोरांव कुलदेव सिंह, राजस्व निरीक्षक राजेश कुमार, बिजली विभाग के एसडीओ महेंद्र प्रसाद, जेई आनंद कुमार, पूर्व विधायक रामकृपाल कोल भी मौके पर पहुंचे। सब में बिजली विभाग के खिलाफ गुस्सा था, क्योंकि तार खतरनाक ढंग से नीचे तक लटका था, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। एसडीओ ने बिजली विभाग की ओर से मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का ऐलान किया। इसके बाद पुलिस ने तीनों शवों को सीलकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल इस मामले में कोई केस नहीं लिखा गया है।
शादी के अवसर पर इस घटना से कोहराम मच गया। मारे गए मजदूरों के परिवार के लोगों को गहरा आघात पहुंचा। पहले ही गरीबी की मुसीबत झेल रहे परिवार को इस अनहोनी ने और भी मुश्किल में डाल दिया है। 21 साल के नीरज आदिवासी की भतीजी की तीन जून को शादी होनी है। घरवाले तैयारी में जुटे थे। उसकी मां रीता देवी रोती-कलपती रही। उधर, बड़ोखर के ही विंध्यवासिनी आदिवासी की पत्नी भी बच्चों के साथ विलाप करती रही।