इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निर्दोष व्यक्ति को फंसाने के लिए महिला द्वारा यौन उत्पीड़न की झूठी कहानी बनाना असामान्य है। कहा कि देश में यौन उत्पीड़न की शिकार महिला किसी को झूठा फंसाने के बजाय चुपचाप सहती रहेंगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निर्दोष व्यक्ति को फंसाने के लिए महिला द्वारा यौन उत्पीड़न की झूठी कहानी बनाना असामान्य है। कहा कि देश में यौन उत्पीड़न की शिकार महिला किसी को झूठा फंसाने के बजाय चुपचाप सहती रहेंगी और यौन के असली अपराधी के अलावा किसी और को दोष नहीं देंगी। कोर्ट ने यह टिप्पणी संभल के राजपुरा थाने में दर्ज प्राथमिकी में दुष्कर्म के आरोपी आसाराम की जमानत अर्जी खारिज करते हुए की है।
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याची पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़की को सुनसान जगह लेजाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके बाद उसे अगले दिन बाहरी इलाके में छोड़ दिया। याची की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है। पीड़िता को कोई चोट नहीं है और कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है, लेकिन कोर्ट ने याची के तर्कों स्वीकार नहीं किया और जमानत अर्जी खारिज कर दी।