इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज होने के 17 साल बाद याचियों से पूछताछ करने के लिए सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस भेजने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायशास्त्र का मजाक है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज होने के 17 साल बाद याचियों से पूछताछ करने के लिए सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस भेजने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायशास्त्र का मजाक है। कोर्ट ने निचली अदालत को याचियों की अग्रिम जमानत अर्जी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी और न्यायमूर्ति गजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने बलिया के देवेंद्र सिंह व चार अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। मामले में याचियों की ओर से कहा 17 वर्ष पुराने मामले में पुलिस ने उन्हें 160 सीआरपीसी के तहत 19 अप्रैल 2023 को समन जारी कर बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है। मामले में पुलिस ने याचियों के साथ कुल 106 लोगों को आरोपी बनाया है।
याचीगण वरिष्ठ नागरिक हैं और सेवानिवृत्त हो चुके हैं। याची देवेंद्र सिंह ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। दूसरे याची परशुराम एडीओ पद से, राम किशुन यादव ब्लॉक प्रमुख और प्रतिवादी संख्या 4 और 5 कोटेदार थे। यह भी कहा गया कि जांच 17 साल से बिना किसी ठोस परिणाम के चल रही है। याचीगण सहयोग के लिए तैयार हैं लेकिन उनके हितों की सुरक्षा की जाए। इस पर कोर्ट ने हैरानी जताई। कोर्ट ने याचियों को अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट देते हुए निचली अदालत को कहा है कि वह इस पर विचार करे।