याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने कहा, यदि लागू आदेश को रद्द नहीं किया गया, तो गलत मिसाल होगी, क्योंकि यदि किसान ऋण लेने के बाद वापस नहीं करता है, तो याचिकाकर्ता के पास इसकी वसूली के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं होगा। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिका का पुरजोर विरोध किया। कहा, याचिकाकर्ता को एमएसएमईडी अधिनियम के तहत किसी भी वित्तीय सेवाओं के लिए पंजीकृत नहीं किया गया है।
कोर्ट ने कहा,ऋण वितरण के समय अर्थात 9.3.2018 को याची कंपनी एमएसएमईडी अधिनियम के तहत वित्तीय सेवाओं की श्रेणी में पंजीकृत नहीं थी। इस प्रकार याचिकाकर्ता इसके तहत किसी भी राहत का हकदार नहीं है। कोर्ट ने याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।