भगवान के जागने के बाद शालिग्राम-तुलसी विवाह के मौके पर घाटों की सीढ़ियों, मंदिरों और घरों को रंगोली और चावल-हल्दी, गेरू की अल्पनाओं से सजाया गया। शुभ, लाभ और स्वास्तिक के प्रतीक बनाकर रंगोली से सजाए गए। इसी के साथ बधाइयां बजने लगीं। गन्ने और आम के पत्तों से भगवान विष्णु के लिए मंडप बनाए गए। घी की अखंड ज्योति जलाकर भगवान की प्रतिमाओं की पूजा-आरती की गई। उधर, तुलसी और लक्ष्मी को स्नान कराने के बाद नए परिधान अर्पित किए गए।
साथ ही रोली, अक्षत, कुमकुम, सफेद और पीले पुष्प अर्पित किए गए। पंच मिठाई, पंचमेवा, तुलसी के पत्ते के साथ पंचामृत भोग लगाया गया। इसके बाद लोक कल्याण के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी किया गया। शाम होते ही शालिग्राम-तुलसी विवाह के बाद शहर के लॉन, होटल और वाटिकाओं में बारातें पहुंचने लगीं। इस दौरान जगह-जगह बैंडबाजा के साथ बारातें निकलने से सड़कों पर उत्सव जैसा माहौल रहा। बाराती नाचते हुए निकले।
दो महीनों में गिनती के ही शुभ मुहूर्त हैं। ज्योतिषाचार्य पं. सोमवार से शुभ लग्नों की शुरुआत हो गई है, लेकिन, इस बार शादियों की लग्न गिनती की है। चालू महीने में सोमवार के बाद दूसरी लग्न 20 नवंबर को है। इसके बाद 21, 22, 26, 27, 28, 29, 30 नवंबर को और फिर अगल माह 1, 2, 5, 7, 11, 12 और 13 दिसंबर को शुभ मुहूर्त मिलेंगे। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र।
दो महीने भले ही गिनती की लग्न हैं, लेकिन शादियों के लिए शहर में होटल, शादी घर, मंडपम, धर्मशाला और वाटिकाएं पहले से ही बुक हैं। घोड़ियों के साथ ही बैंडबाजा और रथ तो अब ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इस बार दो महीने के भीतर ही जिले में 10 हजार से अधिक शादियां होने का अनुमान है। सुजीत कुमार यादव, अध्यक्ष-प्रयागराज लाइट एंड साउंड वेलफेयर एसोसिएशन