यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने सहज सारथी फाउंडेशन व अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। महाकुंभ के मद्देनजर प्रयागराज में एम्स जैसी सुविधाएं मुहैया कराने वाले अस्पताल की स्थापना की मांग को लेकर सहज सारथी संस्था याचिका दायर की थी।
केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि प्रयागराज में एम्स की स्थापना की फिलहाल कोई योजना नहीं है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का निर्माण किया गया है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर कर तल्ख टिप्पणी की। कहा, अधिकारियों ने रिपोर्ट के नाम पर खानापूरी की है। इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत का आकलन कर 18 सितंबर तक रिपोर्ट पेश करें।
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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने सहज सारथी फाउंडेशन व अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। महाकुंभ के मद्देनजर प्रयागराज में एम्स जैसी सुविधाएं मुहैया कराने वाले अस्पताल की स्थापना की मांग को लेकर सहज सारथी संस्था याचिका दायर की थी। इस पर कोर्ट ने दो टूक पूछा था कि क्या केंद्र के पास प्रयागराज में एम्स या उसके जैसी चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पताल की कोई योजना है या नहीं।
याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने दलील दी थी कि महाकुंभ जैसे विश्वव्यापी आयोजन में करोड़ों लोग प्रयागराज आते हैं। यहां हाईकोर्ट, एजी ऑफिस, शिक्षा निदेशालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय हैं, लेकिन चिकित्सा व्यवस्था खस्ताहाल है। यहां की आबादी को भी ध्यान दें तो प्रयागराज में एम्स जैसे अस्पताल स्थापित करने की सख्त जरूरत है। नियमानुसार प्रयागराज एम्स की स्थापना के सारे मापदंड पूरे करता है।
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इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से मौजूदा चिकित्सा व्यवस्था का आकलन करते हुए जानकारी पेश करने का आदेश दिया था। लेकिन, केंद्र सरकार की ओर से गोलमोल जवाब दिया गया। इससे खफा कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को प्रयागराज की खस्ताहाल चिकित्सा सुविधाओं का सही आकलन कर रिपोर्ट सही जानकारी देने के लिए 18 सितंबर तक की मोहलत दी है।