उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने अब एपीएस भर्ती-2010 के संदिग्ध चयनितों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीबीआई की टीम लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी आयोग में डटी रही। वहीं, गोविंदपुर स्थित सीबीआई के कैंप कार्यालय में भी हलचल रही। कैंप कार्यालय में एपीएस-2010 के चयनित अभ्यर्थियों से दिनभर पूछताछ हुई। सीबीआई की कार्रवाई से चयनितों में हड़कंप की स्थिति है और अब इनमें से कई अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।
सीबीआई ने अपनी एफआईआर में स्पष्ट कर दिया है कि आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ ने नियमों का उल्लंघन किया था और 331 अभ्यर्थियों को अनुचित रूप से लाभ पहुंचाते हुए तीसरे चरण की कंप्यूटर ज्ञान परीक्षा के लिए क्वालीफाई करा दिया था। एपीएस-2010 के तहत 250 पदों पर भर्ती हुई थी और कई ऐसे अभ्यर्थी भी अंतिम रूप से चयनित हुए, जिन्हें अनुचित लाभ देकर तीसरे चरण की परीक्षा के लिए क्वालीफाई कराया गया था। सीबीआई के रडार पर आयोग के कुछ अफसर और कर्मचारी भी हैं, जो एपीएस भर्ती प्रक्रिया से किसी न किसी रूप में जुड़े रहे।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की एक टीम शनिवार को सुबह से ही आयोग में डेरा डाले रही और एपीएस भर्ती से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले। वहीं, गोविंदपुर स्थित सीबीआई कैंप कार्यालय में भी एपीएस-2010 के चयनित अभ्यर्थियों को बुलाकर भी पूछताछ की गई। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिनका चयन संदिग्ध है और उनकी ज्वाइनिंग भी हो चुकी है। कुछ संदिग्ध चयनितों और आयोग के अज्ञात अफसरों/कर्मचारियों के नाम भी सीबीआई की एफआईआर में शामिल किए जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो एपीएस भर्ती के चयनितों की नौकरी पर संकट बढ़ जाएगा।