हाईकोर्ट ने पिछले महीने इन मुकदमों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। साथ ही प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दो महीने के भीतर सौंपने का आदेश दिया था। इसी क्रम में सीबीआई की एक टीम ने शहर में कैंप करना शुरू कर दिया है।
सीबीआई की टीम ने जिले में वकीलों पर दर्ज फर्जी केसों की जांच शुरू कर दी है। हाईकोर्ट के निर्देश पर की जा रही जांच के क्रम में सीबीआई की एक टीम ने शहर में डेरा डाल दिया है। साथ ही अलग-अलग थानों से कुल 46 मुकदमों से संबंधित दस्तावेज भी एकत्र कर लिए हैं। हाईकोर्ट ने पिछले महीने इन मुकदमों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। साथ ही प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दो महीने के भीतर सौंपने का आदेश दिया था।
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इसी क्रम में सीबीआई की एक टीम ने शहर में कैंप करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही उन 46 मुकदमों से संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में ले लिए, जिनके संबंध में आशंका है कि इन्हें धनउगाही व पेशबंदी के मकसद से दर्ज कराया गया। इसमें अकेले मऊआइमा थाने से 24 मुकदमों के दस्तावेज लिए गए। इसके अलावा शिवकुटी, बहरिया, सोरांव व नवाबगंज थाने से भी मुकदमों से संबंधित दस्तावेज एकत्र किए गए।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जल्द ही इन मामलों में संबंधितों का बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू करेगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 20 अक्तूबर को होनी है। सीबीआई को इससे पहले प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी है।
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अधिवक्ता ने की थी जांच की मांग
गौरतलब है कि अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय ने जांच की मांग की थी। आरोप लगाया था कि हाईकोर्ट में वकीलों का एक गैंग है जो झूठे केस दर्ज कराकर मुकदमा वापसी के नाम पर अभियुक्तों से धनउगाही कर बंटवारा कर लेता है। पीड़िता के अनुसूचित जाति का होने के कारण सरकार से धन भी मिलता है। भूपेंद्र ने खुद के खिलाफ भी दारागंज थाने में फर्जी केस दर्ज कराने का आरोप लगाया है।