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दुष्कर्म केस के गवाह को जेल भेजने का मामला : असिस्टेंट प्रोफेसर सहित निलंबित इंस्पेक्टर-दरोगा पर एफआईआर दर्ज

Fri, 12 Nov 2021 01:59 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज

सार

दुष्कर्म केस के गवाह को जेल भेजने का मामला : असिस्टेंट प्रोफेसर सहित निलंबित इंस्पेक्टर-दरोगा पर एफआईआर दर्ज
 
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prayagraj : Harassment - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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कर्नलगंज में दर्ज दुष्कर्म केस के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में बृहस्पतिवार को फिर बड़ी कार्रवाई हुई। मामले में निलंबित किए जा चुके पूर्व हंडिया इंस्पेक्टर बृजेश सिंह और दरोगा बलवंत यादव समेत तीन के खिलाफ जार्जटाउन थाने में नामजद एफआईआर दर्ज की गई। मुकदमे में तीसरा आरोपी सीएमपी डिग्री कॉलेज का असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव है। इसके अलावा साजिश में आरोपियों के सहयोगी रहे अन्य लोगों को अज्ञात में आरोपी बनाया गया है। कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है।

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जार्जटाउन थाने में एफआईआर पीड़िता के उस शिकायती पत्र के आधार पर दर्ज हुई है, जो उसने एडीजी जोन प्रयागराज समेत अन्य पुलिस अफसरों को दिया था। साथ ही इसकी प्रति भारत के मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, एससी-एसटी आयोग व राज्य महिला आयोग समेत अन्य को भेजी थी। तहरीर में पीड़िता की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सुलह के लिए दबाव बनाता रहा मदन यादव
उसने बताया कि उससे दुष्कर्म का आरोपी मदन यादव अपने पद व प्रभाव के चलते उसके साथ ही उसके गवाह, परिवारीजनों फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर अपने मुकदमे में सुलह के लिए दबाव बना रहा है। इसी के तहत उसने पहले फूलपुर में उसके भाई व गवाह पर दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराया।

इस मामले में एफआर लगने के बाद उसने हंडिया इंस्पेक्टर रहे बृजेश सिंह के साथ मिलकर उसके गवाह को हंडिया में दर्ज दुष्कर्म के मामले में फर्जी तरीके से जेल भेज दिया। यही नहीं आरोप यह भी है कि इसके अलावा भी उसके खिलाफ मदन यादव की तहरीर पर जार्जटाउन थाने में दो फर्जी मुकदमे लिखवा दिए। तहरीर में मांग की गई कि मदन यादव व इस साजिश में शामिल इंस्पेक्टर बृजेश सिंह, एसआई बलवंत यादव व अन्य लोगों पर विधिक कार्रवाई कर उसकी व उसके गवाह व परिवारीजनों की जान-माल की सुरक्षा की जाए।
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कुल 14 धाराओं में लिखा गया केस
निलंबित इंस्पेक्टर-दरोगा व असिस्टेंट प्रोफेसर पर कुल 14 धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इनमें लोकसेवक का किसी व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के आशय से कानून का उल्लंघन करना, लोकसेवक का क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचना, लोकसेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निर्देश की अवज्ञा करना, किसी व्यक्ति को दंड या किसी सपंत्ति की समपहरण से बचाने के आशय से लोकसेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना करना, किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करना समेत अन्य धाराएं शामिल हैं। जिनमें आपराधिक षडयंत्र और एससी-एसटी एक्ट भी शामिल है। 

असिस्टेंट प्रोफेसर व इंस्पेक्टर एक ही गांव के
पीड़िता की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि उसके मुकदमे का आरोपी मदन यादव व निलंबित इंस्पेक्टर बृजेश सिंह दोनों गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर गांव के रहने वाले हैं। इसी के तहत दोनों ने मिलकर यह साजिश रची, जिसमें अपने अन्य सहयोगियों को भी शामिल कर लिया। इसके साथ ही दबाव बनाने के लिए उसके गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजा और उस पर फर्जी केस भी दर्ज कराए।

कई अन्य पुलिसकर्मियों के भी आएंगे नाम
सूत्रों का कहना है कि भले ही मुकदमे में अभी दो ही पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। लेकिन विवेचना के दौरान अभी कई अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आएंगे। गौरतलब है कि इस मामले में कुल आठ पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। इनमें पूर्व सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, इंस्पेक्टर शिशुपाल शर्मा, एसआई महेश चंद्र निषाद, हेड कांस्टेबल पन्नालाल यादव, अजय यादव व कांस्टेबल केके यादव भी शामिल हैं। विवेचना निष्पक्ष ढंग से हुई तो साजिशकर्ताओं के रूप में इन पुलिसकर्मियों का नाम आना लगभग तय है।

अफसर क्यों बंद किए रहे आंखें
  • इस प्रकरण में अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
  • बड़ा सवाल यह है कि विवेचना में खेल होता रहा तो पर्यवेक्षण अफसरों को इसकी जानकारी कैसे नहीं हो सकी।
  • फूलपुर में अगर विवेचना के दौरान मामला फर्जी पाया गया तो फिर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
  • हंडिया में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 169 की रिपोर्ट भेजकर फर्जी तरीकेसे जेल भेजे गए गवाह को रिहा कराया गया, तो उसी समय इस फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
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