दो डॉक्टरों के दर्ज किए बयान
मृतक डॉ. की बहन डॉ. अदिति श्रीवास्तव (जेल अधीक्षक, बिजनौर) ने कोतवाली में तीन डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में सबूत एकत्र करने के लिए तीन में से दो डॉक्टरों के बयान दर्ज किए गए। इस दौरान दोनों ही डॉक्टरों से करीब 20 से ज्यादा सवाल पूछे गए। एसआरएन में करीब तीन घंटे जांच करने के बाद टीम देर-शाम वापस लखनऊ रवाना हो गई।
शासन को सौंपा जाएगी ओपिनियन रिपोर्ट
शव मिलने के बाद पता चला था कि कार्तिकेय ओटी से गायब हो गए थे। इस कड़ी में जांच आगे बढ़ाई गई। केस की गुत्थी सुलझाने के लिए स्टेट मेडिको लीगल सेल ने ओटी और घटनास्थल की दूरी भी मापी। पाया कि ओटी से कार्तिकेय की कार लगभग 140 कदम की दूरी पर खड़ी थी। इसी में कार्तिकेय का शव मिला था। वहीं, सूत्रों के अनुसार स्टेट मेडिको लीगल सेल अपनी ओपिनियन रिपोर्ट अगले माह तक शासन को साैंप देगा। इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह था मामला
कार्तिकेय श्रीवास्तव एसआरएन अस्पताल के पार्किंग एरिया में अपनी कार के भीतर मृत पड़े मिले थे। कार में एनेस्थीसिया में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन के दो वायल और सिरिंज मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई थी। उनकी बहन ने हत्या का शक जताते हुए संस्थान के ही एक असिस्टेंट प्रोफेसर व दो जूनियर डाॅक्टरों पर केस दर्ज कराया था। कार्तिकेय मूल रूप से जिला कोटद्वार उत्तराखंड के रहने वाले थे।
कार की भी हुई वीडियोग्राफी
कार्तिकेय का जिस कार में शव मिला था, टीम ने उसे भी पूरी तरह खंगाला। इसके साथ ही वीडियोग्राफी और फोटो भी ली गई। बता दें कि इस कार की पहले भी दो बार फॉरेंसिक जांच हो चुकी है। वहीं, कोतवाली थाना प्रभारी ने बताया कि लखनऊ से आई टीम देर शाम को वापस लौट गई।