सिविल लाइंस, गुलाटी मार्ग, लूकरगंज, जार्जटाउन जैसे पॉश इलाकों में बने निजी बहुमंजिला अपार्टमेंट्स में जिन लोगों ने एक-डेढ़ करोड़ रुपये के फ्लैट खरीदे हैं, आने वाले दिन उनके लिए मुसीबत भरे साबित होने जा रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ उन बिल्डरों की भी मुश्किल बढ़ने जा रही हैं, जिन्होंने अपार्टमेंट्स बनवाने के बाद उसमें फ्लैट मोटी रकम में बेचे, जबकि फ्लैट की रजिस्ट्री के दौरान उसकी कीमत कम दिखाई। ऐसे लोगों के खिलाफ आयकर विभाग की जांच तकरीबन पूरी हो चुकी है और जल्द ही उन्हें खरीदने वाले और बेचने वाले बिल्डरों के पास नोटिस पहुंच सकता है।
शहर में पिछले 10 वर्षों में फ्लैट कल्चर तेजी से बढ़ा। इस बीच बिल्डरों ने गुणा-गणित कर शहर के तकरीबन हर हिस्से में बड़े-बड़े बंगले और प्लाट पर ऊंचे-ऊंचे अपार्टमेट्स खड़े करा दिए। शुरूआत में दो तथा तीन बेडरूम वाले फ्लैट 25 से 40 लाख या अधिकतम 50-60 लाख रुपये में बिके लेकिन बीते डेढ़-दो वर्ष में कई बिल्डरों ने लग्जरी अपार्टमेंट्स तैयार कराएं। 30 से 40-50 तक फ्लैट वाले ऐसे अपार्टमेट्स सिविल लाइंस, गुलाटी मार्ग, लूकरगंज, जार्जटाउन जैसे पॉश इलाकों में बने। यह फ्लैट्स 80 लाख से डेढ़ करोड़ तक में बेचे गए। मजे की बात यह कि अफसर, डॉक्टर, व्यापारी जैसे लोगों ने इन फ्लैटों को हाथो-हाथ खरीद लिया।
ऐसे बिल्डरों और फ्लैट खरीदने वालों के खिलाफ जांच नोटबंदी के फैसले के पहले से चल रही है लेकिन आठ नवंबर के बाद इसमें तेजी आ गई। अपार्ट्मेट्स में एक से डेढ़ करोड़ रुपये तक के फ्लैट बेचने वाले बिल्डरों का विभाग ने ब्योरा तैयार कर लिया है। रजिस्ट्री विभाग से ब्योरा लेने के बाद बाद आयकर विभाग ने गोपनीय जांच कराके फ्लैटों की कीमतें भी पता कराई। इसके बाद इन फ्लैटों की रजिस्ट्री में लगे स्टैंप और फ्लैट की मूल कीमत में भारी अंतर का पता चला। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक एक करोड़ से अधिक के फ्लैट की कीमत रजिस्ट्री के कागजातों में आधी से भी कम दिखाई गई है। इसमें बड़े पैमाने पर स्टाम्प ड्यूटी की चोरी का भी पता चला है। अब विभाग नोटिस भेजकर बिल्डर और फ्लैट खरीदने वालों से आय का हिसाब पूछने की तैयारी कर रहा है।