Prayagraj News : मिर्जापुर के जंगलों में छात्र के शव की खोजबीन करती पुलिस।
- फोटो : प्रयागराज
शाम को अपहर्ताओं ने दोबारा मूलचंद को फोन किया। तब तक कॉल ट्रेस हो गई थी। पुलिस ने उसी दिन कोरांव के रहने वाले दो सगे भाइयों अर्जुन और भीम को पकड़ लिया। कुछ समय बाद उनके मौसेरे भाई दीपक को भी पकड़ लिया गया। पूछताछ में तीनों ने बताया कि उन लोगों ने अंकित को 20 अगस्त को ही मार दिया था। दीपक का बहनोई पुष्पराज भी उनके साथ शामिल था। अंकित का अपहरण करने के बाद वे उसे कोरांव के पचेहता गांव स्थित दीपक के घर पर ले गए। रात भर उसे घर पर ही रखा। सुबह चारों अंकित को लेकर ड्रमंडगंज के जंगल में पहुंचे।
वहां अंकित की गला दबाकर हत्या कर दी और पहाड़ी से शव जंगल में फेंक दिया। इसके बाद चारों वापस आ गए। 25 अगस्त को दीपक ने अपने एक दोस्त के मोबाइल से मूलचंद्र को फोन कर 30 लाख की फिरौती मांगी। कॉल ट्रेस कर पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। आरोपियों के साथ पुलिस 25 अगस्त से ही अंकित के शव को खोज रही थी। रविवार की शाम जंगल से शव बरामद हो गया। पुलिस ने कोरांव के अर्जुन, भीम, दीपक और पुष्पराज को गिरफ्तार कर लिया है। मूलचंद के परिवार से तमाम लोग और पुलिस की एक टीम सूचना मिलते ही ड्रमंडगंज के लिए रवाना हो गई थी।
Prayagraj News : मिर्जापुर पहाड़ी पर शव की खोजबीन करते पुलिसकर्मी।
- फोटो : प्रयागराज
चारों आरोपियों को पहले से जानता था अंकित
कोरांव के रहने वाले अपहर्ताओं को अंकित अच्छी तरह से जानता था। इसी कारण जब उसे गाड़ी पर बैठाया गया तो उसने प्रतिरोध नहीं किया। दरअसल अंकित का ननिहाल बारा इलाके के जियाराम का पूरा में है। अपहर्ता दीपक की बहन भी उसी गांव में ब्याही है। इसी कारण दोनों परिवार एक दूसरे से परिचित थे। अपहर्ताओं को बारा से ही भनक मिली थी कि अंकित के पिता ने 70 लाख की जमीन बेची है। इन्हीं पैसों के कारण अंकित का अपहरण और फिर हत्या कर दी गई।
पुलिस ने 25 अगस्त को जब आरोपियों को ट्रेस कर लिया तो अंकित के घर वाले हैरान रह गए। वे सभी अपहर्ताओं को जानते थे। अंकित अक्सर अपने ननिहाल में जाता था। वहीं पड़ोस में दीपक भी अपनी बहन के घर आता जाता था। यहीं पर दीपक और उसके मौसेरे भाइयों अर्जुन और भीम को पता चला कि अंकित के पिता ने 70 लाख की जमीन बेची है। इसी के बाद तीनों ने अपहरण का प्लान बनाया।
दीपक ने इस योजना में अपने बहनोई पुष्पराज को भी शामिल किया। चारों से पुलिस ने जब पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि अपहरण तो कर लिया था लेकिन वे काफी डर गए थे। इसी कारण उन्होंने अगले दिन ही अंकित की हत्या कर दी। इसके बाद वे पता करते रहे कि अंकित के घर वाले क्या कर रहे हैं। 25 अगस्त तक जब सब कुछ सामान्य रहा तो उन्होंने मूलचंद्र को फोन कर 30 लाख की फिरौती मांगी।
Prayagraj News : मिर्जापुर पहाड़ी पर शव की खोजबीन करते पुलिसकर्मी।
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