स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में पहुंचे।
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महाकुंभ के ट्रायल के रूप में संगम की रेती इस बार गो माता की रक्षा के सवाल पर भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान के संघर्ष की साक्षी बनेगी। इस बार माघ मेले में गो माता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गो संसद बुलाई है। मंगलवार को दो पीठों के शंकराचार्यों की मौजूदगी में गो माता को राष्ट्रमाता घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
छह फरवरी को होने वाली गो संसद में देश भर के प्रतिनिधि शामिल होंगे। रविवार को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य ने त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर से गो सेवकों और रक्षकों की टोलियों के साथ समर्थन यात्रा निकाली। यात्रा में शंकराचार्य आगे-आगे और उत्साहित भक्त जयकारे लगाते पीछे चलते रहे।
कहीं पर श्रद्धालुओं ने पुष्प बरसाए, तो कहीं आरती उतारी। अनेक शिविरों में शंकराचार्य का भव्य स्वागत किया गया और इस मुद्दे पर समर्थन दिया गया। उन्होंने महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा के अलावा जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य से मिलकर विचार- विमर्श भी किया।
शंकराचार्य ने भारतीय नस्ल की गाय को ‘रामा गाय’ का नाम दिया गया है। यहां ‘रा’ का अभिप्राय राष्ट्र से और ‘मा’ का माता से है। उन्होंने कहा कि जबतक हिंदू जागृत नहीं होंगे, तब तक हम लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकेंगे। पदयात्रा त्रिवेणी पांटून पुल से होते हुए संगम तट पर लेटे हनुमान मंदिर पहुंची। वहां शंकराचार्य ने पूजन किया। इसके बाद दशाश्वमेघ मंदिर होते हुए पुनः मेला क्षेत्र के सेक्टर पांच के शिविरों में उपस्थित संतों, कल्पवासियों से मिलकर उन्होंने गो संसद में प्रतिभाग के लिए अपील की।