बताया जा रहा है कि दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले तमिलनाडु ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां हिंदी विरोधी आंदोलन अभी थमा नहीं है। ऐसे में भाजपा वहां काशी तमिल संगमम के जरिये उत्तर एवं दक्षिण की संस्कृतियों को जोड़ते हुए अपनी एक अलग छाप छोड़ने का प्रयास कर रही है। इसके पूर्व पश्चिम बंगाल में भी भाजपा ने 2014 में दो लोकसभा सीट जीतने के बाद 2019 में अपनी सीटों की संख्या 18 तक पहुंचाई।
2014 के लोकसभा में भाजपा का वोट शेयर तमिलनाडु में जहां पांच फीसदी था तो वहीं 2019 में गठबंधन करने केे बाद भाजपा का वोट प्रतिशत घटकर चार फीसदी के पास पहुंच गया। तमिलनाडु के पड़ोसी राज्य केरल में भी भाजपा के वोट शेयर में लगातार इजाफा हो रहा है। इसी तरह दक्षिण भारत का एकमात्र राज्य कर्नाटक ही है जहां भाजपा की सरकार भी है, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलगांना में भी भाजपा के वोट शेयर में विगत दो चुनाव में इजाफा ही हुआ है।
भाजपा काशी प्रांत उपाध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि इस आयोजन के राजनीतिक निहतार्थ निकालने की जरूरत नहीं है। यह कार्यक्रम को संस्कृतियों को जोड़ने का है। हम युवा पीढ़ी को काशी और तमिलनाडु के संबंधों के बारे में बताना चाहते हैं। वहां के लोग खुद को काशी और प्रयागराज के करीब पाते हैं।