शोध के दौरान बिस्किट को नीले-हरे शैवाल स्पिरुलिना के साथ फोर्टिफाइड किया गया था, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए। यह शोध कार्य गृह विज्ञान विभाग की अमातुल फातिमा ने तत्कालीन विभागाध्यक्ष एवं इविवि की वर्तमान कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव की देखरेख में किया था। इविवि के खाते में तब बड़ी उपलब्धि आई, जब 2019 में इसे पेटेंट कराया गया।
सबसे बड़ी बात कि शोध का लाभ अब सीधे समाज के लोगों को मिलने जा रहा है। जल्द ही यह बिस्किट बाजार में बिकने लगेगा। इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर के अनुसार इस बिस्किट के व्यावसायिक उत्पादन के लिए 21 अक्तूबर को वेकारिया हेल्थकेयर एलएलपी के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जल्द ही यह बिस्किट आम लोगों के लिए बाजार में आ जाएगा।