जमानत मिलने के बावजूद जेल से नहीं निकल पाएंगे बाहर
वकील की दलील थी कि मुख्तार ने सजा से ज्यादा समय का कारावास ट्रायल के दौरान भुगत चुके हैं। इस मामले में कोर्ट ने बांदा जेल अधीक्षक से भी रिपोर्ट मांगी थी। बांदा जेल अधीक्षक की ओर से कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की गई थी। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत अर्जी का विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने मुख़्तार की जमानत मंजूर करते हुए जुर्माने पर भी रोक लगा दी।
हालांकि सजा पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, जिसके कारण मुख्तार अंसारी को जमानत मिलने के बावजूद जेल में ही रहना होगा, क्योंकि कई अन्य मामलों में अभी जमानत नही मिली है। गौरतलब है कि इसी मामले में मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। गाज़ीपुर एमपी एमएलए अदालत ने अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा सुनाई थी, जिससे उनकी संसद सदस्यता समाप्त हो गई थी।