सिविल लाइंस में करंट से झुलसे किशोर मनीष (17)की रेलवे अस्पताल में मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। परिजनों व दोस्तों ने आरोप लगाया कि वह गिड़गिड़ाते रहे लेकिन डॉक्टर एक घंटे की देरी से पहुंचे। समय से इलाज न मिलने की वजह से उनके बेटे की जान चली गई। हंगामे की सूचना पर कई थानों की फोर्स पहुंची तब जाकर परिजनों को शांत कराया जा सका। पुलिस का कहना है कि परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे, ऐसे में लिखापढ़ी के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया।
मूल रूप से बिहार का रहने वाला मोहन रेलवे में कुली है। वह परिवार समेत बलईपुर में रहता है। घर में पत्नी के अलावा तीन बेटियां हैं जबकि मनीष इकलौता बेटा था। एंग्लो बंगाली कॉलेज से इसी साल इंटर करने के बाद वह बीए कर रहा था। साथ ही एसएससी की तैयारी में भी लगा था। पिछले दिनों कॉलोनी में ही गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी, जिसका रविवार को विसर्जन होना था। शाम चार बजे के करीब दोस्तों संग मनीष भी पूजा पंडाल में था।
इसी दौरान वहां लगे पंखे में करंट उतर आया और वह इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। इससे वहां अफरातफरी मच गई। गंभीर हालत में परिजन व दोस्त उसे लेकर रेलवे अस्पताल पहुंचे जहां कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। इस पर वहां हंगामा होने लगा। परिजनों व दोस्तों ने आरोप लगाया कि बार-बार मिन्नतें करने के बावजूद मनीष का समय से इलाज नहीं शुरू किया गया।
नर्स व अन्य स्टॉफ डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। वक्त रहते इलाज न मिलने से आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। उधर अस्पताल में हंगामे की सूचना पर सिविल लाइंस पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन लोगों का आक्रोश देख पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। हालात को देखते हुए कई अन्य थानों की फोर्स भी बुला ली गई। बाद में बहुत समझाने पर मामला शांत हुआ। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस ने बताया कि परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे। ऐसे में शव उनको सौंप दिया गया। फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है।
बदहवास हो गई मां, फूट-फूटकर रोईं बहनें
घटना की जानकारी पर मनीष के परिवार में कोहराम मचा रहा। अस्पताल पहुंची मां इकलौते बेटे का शव देखकर बदहवास सी हो गई। उधर बहनें भी फूट-फूटकर रोती रहीं। पिता के भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर मृतक के दोस्त भी बिलखते रहे। उनका कहना था कि अस्पताल में लापरवाही न होती, तो शायद मनीष की जान बच जाती।