केंद्र सरकार की ओर से आयुर्वेदिक चिकित्सकों को 158 सर्जरी करने की छूट दिए जाने के बाद शुरू हुए विवाद में सोमवार को नेशनल इंटरीग्रेशन मेडिसिन एसोसिएशन भी सामने आ गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर 11 दिसंबर को दिन भर मरीजों का नि:शुल्क उपचार करने की घोषणा की।
नीमा अध्यक्ष डॉ. एसके राय ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से आयुर्वेदिक चिकित्सकों को कुछ सर्जरी किए जाने की छूट दिए से एलोपैथी विधा के चिकित्सकों ने मुहिम छेड़ दी है और चरणबद्ध तरीके से आठ दिसंबर से आंदोलन शुरू कर दिया है। 11 दिसंबर को एलोपैथ चिकित्सकों का संगठन दिन भर हड़ताल पर रहेगा। उनका संगठन इसकी भर्त्सना करता है।
यह एलोपैथ के चिकित्सकों की ओर से लोगों में गलत तरीके से भ्रम फैलाया जा रहा है। शल्य क्रिया आयुर्वेद का हिस्सा है। सुसुप्त ऋषि इसके प्रणेता हैं। एलोपैथ ने इसे ही विकसित कर उस पर कब्जा जमा लिया। जबकि शल्य विधा आयुर्वेद का हिस्सा रही है और यह पुराने जमाने से है। उन्होंने कहा कि एलोपैथ चिकित्सकों के इस आंदोलन के विरोध में सभी आयुर्वेद चिकित्सक बड़े-बड़े निजी अस्पतालों की आईसीयू वगैरह संभाल रहे हैं वह अपनी क्लीनिकों पर दिन भर मरीजों का नि:शुल्क उपचार करेंगे। वार्ता में नीमा के महासचिव डॉ. अरविंद मिश्रा, कोषाध्यक्ष डॉ. डीके श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष डॉ. राशिद आदि ने भी अपनी बात रखी।