कोर्ट ने अदालत के 28 मार्च 23 के आदेश को रद्द कर प्रकरण तय करने के लिए सिविल जज को वापस भेज दिया। कहा, मथुरा के अधिकांश पुराने व प्रसिद्ध मंदिर कानूनी विवादों में फंसे हैं। लोगों में मंदिरों का रिसीवर बनने की होड़ लगी है। ये ट्रस्ट, सेवायतों व प्रबंध समिति को मंदिर व्यवस्था नहीं करने दे रहे। अदालत से नियुक्त रिसीवर मंदिर प्रबंधन देख रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मथुरा के पुराने मंदिरों में प्रबंधकीय विवाद के कारण बन रहे वकीलों को रिसीवर नियुक्त से बचने की जरूरत है। क्योंकि, वे सिविल वादों का निस्तारण करने में रुचि नहीं ले रहे। यह तल्ख टिप्पणी कर कोर्ट ने कहा, वेद शास्त्र का ज्ञान रखने वाले श्रद्धालु को मंदिरों का प्रशासन व प्रबंधन सौंपा जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मथुरा के देवेंद्र कुमार शर्मा के मामले में दाखिल अवमानना याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने अदालत के 28 मार्च 23 के आदेश को रद्द कर प्रकरण तय करने के लिए सिविल जज को वापस भेज दिया। कहा, मथुरा के अधिकांश पुराने व प्रसिद्ध मंदिर कानूनी विवादों में फंसे हैं। लोगों में मंदिरों का रिसीवर बनने की होड़ लगी है। ये ट्रस्ट, सेवायतों व प्रबंध समिति को मंदिर व्यवस्था नहीं करने दे रहे। अदालत से नियुक्त रिसीवर मंदिर प्रबंधन देख रहा है।
हाईकोर्ट ने जिला जज मथुरा से विवादित मंदिरों की सूची मांगी। हाईकोर्ट व अधीनस्थ अदालतों के अधिवक्ता चंदन शर्मा ने जिला जज को रिपोर्ट दी। बताया कि मथुरा में कुल 197 मंदिर विवादों में घिरे हैं। वृंदावन, गोवर्धन, बलदेव, गोकुल, बरसाना, माठ आदि जगहों पर मंदिर स्थित हैं।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कमेटी को रिसीवर बनाने का आदेश दिया था। लेकिन, एक वकील को ही बनाया गया तो अवमानना याचिका दायर कर याची ने खुद को रिसीवर नियुक्त करने की मांग की। 1957 में गिरिराज सेवक समिति बारा बाजार, गोवर्धन पंजीकृत हुई। जो गिरिराज मंदिर का प्रबंधन देखती थी। 1998 तक शांति से चलता रहा। इसके बाद चुनाव को लेकर विवाद शुरू हुआ। पीठासीन अधिकारी ने सन 2000 में चुनाव को वैध घोषित किया, जो सिविल वाद व याचिका में उलझता गया।