यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सूर्यनारायण सिंह ने कुलपति से छुट्टी मांगी है और इस पूरे मामले की समयबद्ध एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हालांकि आरोप दो साल पुराना है लेकिन, इविवि प्रशासन अब हरकत में आया है, सो विवाद भी अचानक बढ़ गया है। डॉ. सूर्यनारायण ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बताया है।
इविवि के हिंदी विभाग में अतिथि प्रवक्ता रहीं एक महिला ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन 30 अप्रैल 2017 को डॉ. सूर्यनारायण पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। वह महिला वर्ष 2017-18 सत्र में भी हिंदी विभाग में अतिथि प्रवक्ता के रूप में काम करती रहीं लेकिन 30 अप्रैल 2018 के बाद विश्वविद्यालय छोड़ दिया, क्योंकि इसके बाद हिंदी विभाग में स्थायी नियुक्तियां हो गईं और अतिथि प्रवक्ता का कोई पद नहीं रह गया। मामले में हुई शिकायत की जांच के लिए कमेटी भी बनाई गई थी और डॉ. सूर्यनारायण ने अगस्त 2017 में कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा था।
उस वक्त भी डॉ. सूर्यनारायण ने यह मांग की थी कि दूसरे पक्ष ने कमेटी को जो प्रमाण दिए हैं, उससे उन्हें अवगत कराया जाए और जांच रिपोर्ट भी दिखाई जाए लेकिन उन्हें यह भी नहीं पता चला कि जांच रिपोर्ट कब आई। बल्कि आरोप लगाने वालीं अतिथि प्रवक्ता ने फरवरी-2019 में अचानक शिकायती पत्र देकर मांग की कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हो और शुक्रवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में कमेटी ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। अब डॉ. सूर्य नारायण ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को पत्र लिखकर दो माह का अर्जित अवकाश मांगा है।
साथ ही यह मांग भी की है कि मामले की समयबद्ध एवं उच्चस्तरीय जांच हो।
जांच पूरी होने तक वह कुलपति का अनुसरण करते हुए इविवि परिसर में प्रवेश नहीं करेंगे। डॉ. सूर्यनारायण ने मांग की है कि अधिकतम चार माह में जांच पूरी कराई जाए। जरूरत पड़ी तो वह अपनी छुट्टी बढ़ा देंगे। उनका कहना है कि इस बेबुनियाद आरोप से उनकी छवि धूमिल हुई है और परिवार के सदस्यों समेत उन्हें मानसिक प्रताड़ना हुई है, जिसकी भरपाई बिना जांच संभव नहीं है।
इविवि में चर्चा है कि डॉ. सूर्यनारायण सिंह पहले से ही इविवि प्रशासन के निशाने पर थे। इविवि के हिंदी विभाग में हुई नियुक्तियों के तहत स्क्रीनिंग प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी के आरोप लगे थे और इसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है। याचिका दाखिल करने वाले इविवि के ही पुरा छात्र हैं। विश्वविद्यालय में यह बात फैलाई गई कि याचिका दाखिले करने वालों के पीछे डॉ. सूर्यनारायण का हाथ है।
छले साल नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाने के मामले में तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. केएस पांडेय को उनके पद से हटा दिया गया था। इसके अलावा डॉ. सूर्यनारायण ने सोशल मीडिया पर सत्ता पक्ष के विरोध में कुछ टिप्पणी भी की, जिसमें उन्होंने उन्होंने लिखा था, ‘हिटलर की चाल चलेगा तो हिटलर की मौत मारा जाएगा।’ चर्चा है कि शिकायत करने वाले व्यक्ति अनुराग कुमार ने इसे ऐसे प्रस्तुत किया, जैसे की यह बात कुलपति के लिए कही गई हो। इस मामले में भी रजिस्ट्रार कार्यालय से पत्र जारी कर डॉ. सूर्यनारायण से जवाब मांगा गया था। शनिवार को उन्होंने जवाब दे दिया।
डॉ. सूर्यनारायण इविवि की सांस्कृतिक समिति में भी थे लेकिन सत्र 2019-20 के लिए गठित समिति से उन्हें बाहर कर दिया गया है। अब तक समिति के अध्यक्ष रहे प्रो. एए फातमी रिटायर हो चुके हैं, सो अब नई समिति का गठन किया गया है। प्रो. अजय जैतली को नई समिति का चेयरमैन एवं प्रो. संतोष भदौरिया को को-चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा डॉ. ज्योति मिश्रा को कन्वीनर, प्रो. एआर सिद्दीकी, डॉ. बृजेंद्र एवं डॉ. अमृता अंजू को सदस्य और रजिस्ट्रार एवं वित्त अधिकारी को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को छात्रसंघ भवन पर डॉ. सूर्यनारायण का पुतला फूंका और गिरफ्तारी की मांग की। इस दौरान छात्रों ने हिंदी विभाग को बंद करा दिया। उपाध्यक्ष ने कहा कि इसे पहले कुलपति का भी एक महिला से कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था और अब एक और नया मामला सामने आया है, जो विश्वविद्यालय की नैतिकता एवं गरिमा के खिलाफ है। इस मौके पर अक्षय भारती, दुर्गेश सिंह, अजय पांडेय, पंकज यादव, सौरभ शर्मा, अभिषेक आदि मौजूद रहे।