फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुकदमा दर्ज होते ही गिरफ्तारी मानवाधिकारों का उल्लंघन - हाइकोर्ट

Tue, 01 Jun 2021 09:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • कोर्ट ने कहा, बेवजह गिरफ्तारी ही पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत 
  • गिरफ्तारी अंतिम विकल्प व अपवाद स्वरूप होना चाहिए, हेड कांस्टेबिल की अग्रिम जमानत मंजूर
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में पुलिस विभाग में तैनात हेड कांस्टेबिल को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि आपराधिक केस दर्ज होते ही अकारण गिरफ्तारी  मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद किसी की गिरफ्तारी का उपयोग अंतिम विकल्प व अपवाद स्वरूप किया जाना चाहिए। गिरफ्तारी करना जरूरी हो तभी इस शक्ति का प्रयोग किया जाना चाहिए । यही नहीं कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जोगिन्दर कुमार केस में  उल्लिखित नेशनल पुलिस कमीशन की तीसरी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी ही पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत है ।

विज्ञापन

Allahabad High Court - फोटो : PTI
यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने अलीगढ़ में तैनात हेड कांस्टेबिल जोगिन्दर कुमार सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए दिया है। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि याची हेड कांस्टेबिल के खिलाफ 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा थाना देहली गेट, अलीगढ़ में सब इंस्पेक्टर ने दर्ज कराया है। याची पर आरोप लगाया गया है कि वह एक अन्य सिपाही के साथ मिलकर ट्रकों को पास कराने के लिए पैसों की वसूली करता हैं ।
विज्ञापन

allahabad high court - फोटो : social media
इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ। संज्ञान में आने पर विभाग ने मुकदमा दर्ज किया। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि याची को गलत फंसाया गया है व लगाया गया आरोप झूठा है । याची से न तो कोई पैसों की रिकवरी हुई है और न ही वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच करा कर इसकी सत्यता की पुष्टि की गई है। कहा गया था कि पुलिस इस गलत प्राथमिकी के आधार पर याची को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की गई थी। इस अग्रिम जमानत अर्जी का अपर शासकीय अधिवक्ता ने विरोध कर कहा कि मामला गंभीर है । याची की गिरफ्तारी की आशंका निराधार है।

काल्पनिक डर के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने याची पर लगे आरोप, अपराध की प्रकृति तथा कोरोना संक्रमण की बढ़ती दूसरी लहर एवं तीसरी लहर की आशंका पर विचार कर याची की अग्रिम जमानत की अर्जी को सशर्त मंजूर कर लिया। कोर्ट ने कहा कि याची की गिरफ्तारी की दशा में उसे पुलिस रिपोर्ट का कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने तक 50 हजार के व्यक्तिगत बांड व इसी रकम की दो प्रतिभूति प्रस्तुत करने पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। कोर्ट ने इस अग्रिम जमानत में याची को जांच में सहयोग करने समेत कई शर्तें लगाई हैं और कहा है कि इन शर्तों का याची के उल्लंघन करने पर जांच अधिकारी अथवा सरकारी वकील अग्रिम जमानत को निरस्त कराने की अर्जी दे सकता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें