प्रयागराज में वर्ष 2013 में लगे कुंभ मेले में मची भगदड़ के बाद ही विनय कुमार त्रिपाठी को तीन जनवरी 2014 में डीआरएम बनाया गया। यहां उनकी तैनाती 25 अप्रैल 2016 तक रही।
रेलवे बोर्ड के नए चेयरमैन और सीईओ वीके त्रिपाठी का प्रयागराज से गहरा रिश्ता रहा है। प्रयागराज मंडल में दो वर्ष डीआरएम रहने के साथ वह उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में महाप्रबंधक का पद भी छह माह संभाल चुके हैं। जंक्शन पर हुए इंफ्रास्ट्रक्चर के तमाम कार्यों में भी उनका विशेष योगदान माना जाता है। महज पांच वर्ष में ही वह डीआरएम से सीआरबी बन गए।
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प्रयागराज में वर्ष 2013 में लगे कुंभ मेले में मची भगदड़ के बाद ही विनय कुमार त्रिपाठी को तीन जनवरी 2014 में डीआरएम बनाया गया। यहां उनकी तैनाती 25 अप्रैल 2016 तक रही। इस दौरान वर्ष 2019 में लगने वाले कुंभ की तमाम तैयारियां उनके ही कार्यकाल में तय हुईं। इसमें प्लेटफार्म नंबर छह का निर्माण, जंक्शन पर स्कॉई वॉक आदि प्रोजेक्ट प्रमुख रूप से शामिल हैं।
यह सभी कार्य उनके डीआरएम रहने के दौरान ही तय हुए। रुड़की से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री लेने वाले 1983 बैच के भारतीय रेल विद्युत इंजीनियरिंग सेवा (आईआरएसईई) के अधिकारी के रूप में रेल सेवा में आए। मंडल रेल प्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज तथा मुख्य विद्युत लोकोमोटिव इंजीनियर एवं अपर महाप्रबंधक, पश्चिम रेलवे जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी वह कार्य कर चुके हैं।
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पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर में महाप्रबंधक का पद भार ग्रहण करने के बाद उन्हें एक जनवरी 2021 से एनसीआर में भी महाप्रबंधक पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली। यहां छह माह तक उन्होंने महाप्रबंधक का अतिरिक्त दायित्व संभाला। वीके त्रिपाठी ने तीन फेज वाले विद्युत लोकोमोटिव के विकास एवं इसके स्वदेशीकरण में सराहनीय योगदान दिया है। उनके सीआरबी बनने के बाद पूर्वोत्तर रेलवे के दारागंज, झूंसी, प्रयागराज रामबाग और उत्तर रेलवे के प्रयाग, प्रयागराज संगम और फाफामऊ के एनसीआर में विलय की आस बढ़ गई है।