क\लेजों का भी मेरिट क्रमांक है। याची को 20 क्रमांक वाला कॉलेज आवंटित किया जाना चाहिए था। किंतु उसे वहां आवंटित करने के बजाय 41 क्रमांक वाला कॉलेज आवंटित कर दिया। याची की वरीयता वाले कॉलेज में विपक्षी डॉ.चारू मेहरोत्रा को नियुक्ति दे दी गई जबकि उनकी मेरिट याची से कम है। नियमानुसार याची को वरीयता कालेज दिया जाना चाहिए था।
हाईकोर्ट ने निदेशक को दोनों को सुनने के बाद मेरिट पर याची का प्रत्यावेदन तय करने का आदेश दिया था। गलत तरीके से याची की वैध मांग खारिज कर दी गई। कोर्ट ने प्रत्यावेदन तय होने तक याची को आवंटित कॉलेज में नियुक्त करने के लिए बाध्य करने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद ज्वाइन करना पड़ा। इससे उसने अपना चुनौती देने का अधिकार नहीं छोड़ा। एकलपीठ ने बिना पूर्णपीठ के फैसले पर विचार किए याचिका खारिज कर गलती की। इसलिए निदेशक नए सिरे से वरीयता से याची की नियुक्ति करें।