प्रयागराज से गंगा जल भरकर काशी विश्वनाथ के लिए रवाना हुए कांवड़िये।
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सावन लगने के साथ ही कांवड़ यात्रा सोमवार से आरंभ हो गया, लेकिन देश भर से संगम का जल भरने के लिए आने वाले भोले भक्तों के लिए आधी रात तक कच्चे घाटों पर उतरने के लिए बालू की बोरियां बिछाई जाती रहीं। लाइट के लिए खंभे गाड़े जाते रहे। शास्त्री सेतु पर बल्ली के सहारे रस्सी तान कर कांवडि़यों के लिए अलग लेन बनाई जाती रही। अधूरी तैयारियों के बीच महापौर गणेश केसरवानी ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ हकीकत देखी और रात भर में कांवडि़यों के लिए घाट व्यवस्थित करने का निर्देश दिया।
गंगा,यमुना और विलुप्त सरस्वती की त्रिवेणी के जल से देवाधिदेव महादेव के जलाभिषेक के लिए कांवडिये घरों से निकल पड़े हैं। दो सौ मीटर लंबे दशाश्वमेध घाट पर इस बार स्थिति अलग है। वहां महाकुंभ के तहत पक्के घाट का निर्माण होने की वजह से कांवडि़यों के घाट उतरने के लिए दो रास्ते बनाए जा रहे हैं। इसके लिए आधी रात तक बालू की बोरियां बिछाई जाती रहीं। सोमवार को बड़ी संख्या में कांंवड़िये जल भरकर काशी विश्वनाथ के लिए रवाना हुए। पूरा घाट हर हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा।