सिर्फ प्राचीन ग्रंथ ही नहीं, पाठ्यक्रम में धीरूभाई अंबानी, अजीम प्रेमजी और टाटा जैसे सफल लोगों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। विभागाध्यक्ष ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत इस पाठ्यक्रम का संचालन मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट के तहत किया जाएगा। बीबीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद अगर कोई छात्र बीच में इसे छोड़ना चाहता है तो उसे मैनजमेंट का प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
इसी तरह दूसरे वर्ष में कोर्स छोड़ने पर डिप्लोमा दिया जाएगा और तीन वर्ष का कोर्स पूरा करने के बाद बीबीए की डिग्री की दी जाएगी। इसके बाद सीधे पांच वर्ष पर एग्जिट प्वाइंट होगा और छात्र एमबीए को कोर्स पूरा करेंगे। विभागाध्यक्ष ने बताया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) का परिणाम देर से जारी होने के कारण सत्र विलंब से शुरू हुआ है। फरवरी-2024 में पहले सेमेस्टर की परीक्षा कराने के प्रयास हैं।