prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के सीनेट हॉल में शुक्रवार को कवि सम्मेलन और मुशायरे को लेकर हुए विवाद के बाद इविवि प्रशासन ने इस आयोजन से कुलपति के जुड़ाव को लेकर पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि इविवि प्रशासन अब अपनी ही कहानी में उलझता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि रचनाकारों के पैनल में कुछ नए नाम जोड़े गए थे, उसकी पूर्व में सूचना नहीं थी। इसका वीसी से कोई संबंध नहीं है। वहीं, इविवि प्रशासन ने आधिकारिक रूप से जो आमंत्रण पत्र जारी किया था, उनमें वे दो नाम भी शामिल थे, जिन्हें लेकर आपत्ति की जा रही थी।
इविवि प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक आमंत्रण पत्र में यह सूचना दी गई थी कि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव करेंगी। मंडलायुक्त संजय गोयल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। साथ ही आमंत्रण पत्र में इकबाल अशर, पापुलर मेरठी, शबीना अदीब, ताहिर फराज, मोइन शादाब, भूषण त्यागी, हाशिम फिरोजाबादी, भालचंद त्रिपाठी, कलीम कैसर जैसे जाने-माने रचनाकारों के नाम शामिल थे। सोशल मीडिया पर हाशिम फिरोजबादी, शबीना अदीब को कार्यक्रम में बुलाए जाने पर तमाम लोगों ने आपत्ति की। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और शाहीनबाग को लेकर लंबी बहस छिड़ गई और इसके बाद इविवि प्रशासन ने कार्यक्रम निरस्त कर दिया।
इस मामले में इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह कार्यक्रम उर्दू अकादमी की ओर से आयोजित किया जाना था और इसमें विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग एवं सांस्कृतिक समिति को अपना सहयोग प्रदान करना था। पैनल में कुछ नाम जोड़े गए थे, जिनकी पूर्व में सूचना नहीं थी। कार्यक्रम का आयोजन परिसर में होना था, इसलिए कुलपति ने अध्यक्षता करने की सहमति दी थी, लेकिन उनका कार्यक्रम के आयोजन की विस्तृत प्रक्रिया से संबंध नहीं था। कार्यक्रम कुछ अपरिहार्य कारणों से स्थगित करना पड़ा था।