न्यायिक मजिस्ट्रेट सीनियर डिविजन ने कार्रवाई करते हुए याची के खिलाफ पहले समन और फिर गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। याची ने जिला न्यायालय की कार्यवाही को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभू राय ने तर्क दिया कि याची सीधे तौर पर गोरखपुर स्थित आउटलेट पर लेनदेन का काम नहीं करता है। उसके लिए दूसरे कर्मचारी हैं और उनके जरिये ही लेनदेन होता है।
शिकायतकर्ता की ओर से जिस समय के लेनदेन का आरोप लगाया जा रहा है उस दौरान कोविड का दौर भी था। लिहाजा, याची के खिलाफ कार्यवाही को रद्द किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया और याची के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।