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भूमि अधिग्रहण : जसरा बाईपास निर्माण के लिए पहुंची एनएचएआई की टीम को किसानों ने रोका, नहीं मिला है मुआवजा

Wed, 13 Mar 2024 12:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

एनएचएआई के अधिकारी और किसान बुधवार को आमने सामने आ गए। उचित मुआवजे को लेकर किसानों ने काम शुरू करने पहुंचे अधिकारियों को काम लगाने से रोक दिया। कहा कि जिस जमीन पर काम लगाने की तैयारी की जा रही है उसके काश्तकारों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। 
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जसरा बाईपास निर्माण के लिए पहुंचे अधिकारियों को किसानों ने रोका। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जसरा बाइपास के निर्माण के लिए गौहनिया इलाके में काम शुरू करने पहुंचे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और जिला प्रशासन की टीम को किसानों ने काम शुरू करने से रोक दिया। अधिकारी बड़ी संख्या में मजूदरों के साथ जेसीबी आदि वाहन लेकर पहुंचे थे। इसकी जानकारी होते ही बड़ी संख्या में किसान पहुंच गए और कहा कि जिस जमीन पर काम लगाया जा रहा है उस जमीन के काश्तकारों को अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। किसानों का यह भी कहना है कि अभी फसल की कटाई भी नहीं हुई है और खड़ी फसलों को उजाड़ने पर अधिकारी अमादा है। 

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किसानों का आरोप है कि खटंगिया गांव में मंगलवार को अधिकारियों ने किसानों और काश्तकारों की मांगों को अनसुना करते हुए कई बीघे फसल को नष्ट करके काम शुरू कर दिया। अधिकारियों और किसानों के बीच बातचीत में इस बात पर सहमति बनी थी कि मुआवजे का निस्तारण हो जाने और फसल की कटाई होने के बाद ही बाईपास का काम शुरू कराया जाएगा, लेकिन अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं। 

53 दिन चला था आंदोलन

भूमि अधिग्रहण के लिए उचित मुआवजा न मिलने और किसानों का उत्पीड़न करने के खिलाफ कुछ महीने पहले किसानों ने जबर्दस्त आंदोलन चलाया था। 53 दिन तक चले इस आंदोलन के बाद अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। कुछ किसानों को मुआवजा तो मिला है लेकिन वह जमीन के मूल्य से काफी कम है. इसको लेकर भी किसानों में असंतोष व्याप्त है। बड़ी संख्या में किसानों को अभी तक मुआवजे के रूप में एक रूपया तक नहीं मिला है। बुधवार को हाईवे के अधिकारी जिस जमीन पर काम लगाने के लिए पहुंचे थे उस जमीन के काश्तकारों को भी तक मुआवजा नहीं मिला है। 

मार्च 2023 से शुरू हुई है अधिग्रहण की प्रक्रिया

बता दें कि कि मार्च 2023 से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई है। संबंधित भूमि व रकबे का गजट प्रकाशित किया गया था। जून माह में किसानों के नाम के साथ रकबे का प्रकाशन प्रमुख अखबारों में प्रकाशित किया गया। किसानों के द्वारा कोई विरोध नहीं किया गया, लेकिन सितंबर माह में मुआवजे के निर्धारण की जानकारी में कम मुआवजे को लेकर किसान असंतुष्ट हो गए और 10 सितंबर को जसरा-दौना मंदिर पर किसान नेता केके मिश्रा की अगुआई में किसान पंचायत कर आंदोलन शुरू कर दिया। 

मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपर आयुक्त, एडीएम नजूल विशेष भूमि आधिपत्य अधिकारी व एनएचएआई के अधिकारियों ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक कर किसानों का पक्ष सुना। इसके बाद अधिकारियों को किसानों की समस्या हल करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। 

किसानों ने संबंधित अधिकारियों को मुआवजे से संबंधित आवश्यक कागजात दिए। परंतु आज तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला। किसानों का कहना है कि 2015 में रीवा बाईपास के निर्माण में अधिग्रहित की गई गौहनियां और अमरेहा ग्राम सभा के किसानों की भूमि का मुआवजा 80 लाख रुपये बीघा मुआवजा दिया गया था। आठ वर्ष बाद 32 लाख बीघा बनाया गया है, जबकि जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। 
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राकेश टिकैत भी पहुंचे थे जसरा

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने जसरा बाईपास निर्माण में अधिग्रहित की जा रही भूमि से प्रभावित किसानों के आंदोलन में पहुंचे थे। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा था कि वह किसी भी दशा में किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने किसानों से संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा। प्रभावित किसानों ने उन्हें सरकार द्वारा उनकी अधिग्रहित की गई भूमि का कम मुआवजा के संबंध में पत्र सौंपा था।
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