यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने पीड़िता की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 24 हफ्ते के गर्भ पात की अनुमति देता है। ऐसा पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए किया गया है। पीड़िता ने सरकार से अनुमति मांगी थी, किन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट की शरण ली है। जुलाई 2021 मे बुलंदशहर सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच की गई थी। कुल 19 हफ्ते का गर्भ पाया गया है। याची इस अनचाहे गर्भ को गिराना चाहती है। जिसको लेकर याचिका दायर की है। कहा गया है कि इस घटना से पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा है इसलिए गर्भपात की अनुमति दी जानी चाहिए।