कोर्ट ने गवाहों के बयान पर संदेह जताया और कहा कि घटना जिस दुकानदार के सामने हुई उसकी कोई जांच नहीं की गई। इसके अलावा गवाहों के बयान भी आपस में मेल नहीं खा रहे और मेडिकल रिपोर्ट से उसका सामंजस्य नहीं बैठता। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अभियोजन पक्ष और प्रतिवादियों केबीच पहले से दुश्मनी रहीं और उन्होंने ट्रक से हुई दुर्घटना को हत्या में आरोपित कर दिया।
मामले में बाबू नंदन ने अपने भाई राम हरख की हत्या में राम औतार उर्फ बिशुन दयाल, राम पाल, पन्ना लाल और राम चंद्र के खिलाफ पांच जनवरी 1980 में कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
घटना वाले दिन मृतक और उसका बेटा दवा लेने गए थे और जैसे ही वे एक चारा विक्त्रस्ेता की दुकान के सामने पहुंचे। आरोपियों (अपीलकर्ताओं) ने मृतक और उसके बेटे पर हमला कर दिया। दोनों को लोहे की छड़ और लाठी के साथ। इस हमले में दोनों को चोटें आई हैं।