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Allahabad High Court : अधिवक्ता द्वारा राहत पाने को आश्वासन देकर पालन न करने पर कोर्ट गंभीर

Fri, 24 Mar 2023 09:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत पाने के लिए कोर्ट को आश्वासन देकर पूरा न करने को गंभीरता से लिया है और कहा है कि अधिवक्ता न्यायिक संस्था के स्तंभ है। उनसे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती कि अंतरिम राहत पाने के लिए स्वयं के लिए दुखद स्थिति तैयार करें।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत पाने के लिए कोर्ट को आश्वासन देकर पूरा न करने को गंभीरता से लिया है और कहा है कि अधिवक्ता न्यायिक संस्था के स्तंभ है। उनसे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती कि अंतरिम राहत पाने के लिए स्वयं के लिए दुखद स्थिति तैयार करें। जिससे न्याय व्यवस्था प्रभावित हो। कोर्ट ने कहा याची अधिवक्ता ने 12 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट विपक्षी संसारवती के नाम देने का वायदा कर अंतरिम राहत प्राप्त की और आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।

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याचीगण विपक्षी की बेटी दामाद हैं। विपक्षी वकीलों ने कहा तीन बार केस लगा फाइल कोर्ट में नहीं आई। लिस्ट रिवाइज होने पर भी याची अधिवक्ता लक्ष्मीकांत भट्ट मौजूद नहीं है। इस पर कोर्ट ने छह फीसदी व्याज सहित वसूली कार्यवाही करने का भी आदेश दिया।

कोर्ट ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व महासचिव को अधिवक्ताओं के ऐसे आचरण के मुद्दे पर सहयोग करने के लिए अगली तिथि पर बुलाया है। साथ ही याची अधिवक्ता लक्ष्मीकांत भट्ट को भी अपने आचरण की सफाई के साथ मौजूद रहने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एसएसपी मेरठ को भी निर्देश दिया है कि देहरादून के पते पर रह रहे मीनाक्षी व विनोद कुमार कटारिया की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करें।

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देहरादून के उच्चाधिकारियों को पते व आदेश की जानकारी दें। कोर्ट ने महानिबंधक व निबंधक अनुपालन को आदेश की सूचना एसएसपी मेरठ को देने तथा कार्यालय रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने मीनाक्षी व विनोद कुमार कटारिया की धारा 482 के अंतर्गत दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा ही मामला कोर्ट में इससे पहले भी आया था, जिसमें याची की तरफ से दो अलग-अलग अर्जियों में एक ही केस में एक ही तिथि का दो तरह का आदेश दाखिल किया गया है। ऐसा अग्रिम जमानत पाने के लिए किया गया। कोर्ट ने याची अधिवक्ताओं आदित्य प्रसाद मिश्र व प्रदीप कुमार पांडेय से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सफाई मांगी है कि क्यों न उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को कार्यवाही के लिए कहा जाय।
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मामले में मेरठ के मेडिकल थाने में दर्ज मामले में अदालत के सम्मन आदेश व पुनरीक्षण अदालत के फैसले को याचिका में चुनौती दी गई है। 13 दिसंबर 2022 को याची अधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि विपक्षी संख्या दो के नाम 12 लाख का डिमांड ड्राफ्ट देंगे। जिस पर कोर्ट ने अंतरिम राहत दे दी। किंतु आश्वासन का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने अंतरिम आदेश रद्द करते हुए व्याज सहित कोर्ट के जरिए एक माह में वसूली का आदेश दिया। किंतु तीन बार केस लगने के बावजूद सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने कहा कि आश्वासन देकर राहत लेने के बाद पालन न करना और कोर्ट में हाजिर न रहना सही नहीं है। याचिका की अगली सुनवाई छह अप्रैल को होंगी।
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