याची मजिस्ट्रेट ने खुद की बहस
मालूम हो कि महाराजगंज अदालत के वकील अभय प्रताप ने वहीं पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात याची के खिलाफ प्रेम दर्शाने जैसे तमाम आपत्तिजनक संदेश फेसबुक पर डाले और काफी परेशान किया तो याची ने कोतवाली में 11 नवंबर 22 को एफआईआर दर्ज कराई। उसे 23 नवंबर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। किंतु सत्र अदालत ने 17 दिसंबर 22 को जमानत पर रिहा कर दिया। जिसे निरस्त करने के लिए याची मजिस्ट्रेट ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर स्वयं बहस की और कहा कि उसकी शादी में ऐसे संदेश खलल डाल कर उसके वैवाहिक जीवन को बर्बाद कर सकते हैं। इसलिए जमानत निरस्त की जाए।
निचली अदालत ने विवेक का सही इस्तेमाल नहीं किया
कोर्ट ने कहा यह सामान्य मामले से अलग मामला है। सत्र अदालत ने जमानत स्वीकार करते समय स्थिति का सही आकलन नहीं किया। न्यायिक विवेक का सही इस्तेमाल नहीं किया। अपराध में सात साल की सजा हो सकती है। एक न्यायिक अधिकारी को परेशान किया गया। भय पैदा किया। ऐसी स्थिति में किसी से न्यायिक कार्य करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।