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इलाहाबाद हाईकोर्ट: अदालत ने अपने फैसले में विस्तार से समझाया गाय का महत्व, मुस्लिम शासकों का भी किया जिक्र

Wed, 01 Sep 2021 11:01 PM IST
प्राची प्रियम संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम शासकों ने देश के लोगों की भावनाओं को देखते हुए गाय की हत्या पर रोक लगाई थी। यहां तक कि 1857 की क्रांति भी कारतूस में गाय की चर्बी के इस्तेमाल से ही भड़की थी।
 
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Allahabad High Court
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विस्तार
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गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने के अपने फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय के महत्व पर विस्तार से चर्चा की है। कोर्ट ने कहा कि भारत में हिंदुओं ही नहीं, मुस्लिम शासकों ने भी यहां के लोगों की भावनाओं को देखते हुए गो हत्या पर प्रतिबंध लगाया था। बाबर, हुमायूं और अकबर ने अपने धार्मिक त्योहारों में गायों की बलि देने पर रोक लगाई थी। मैसूर के नवाब हैदर अली ने गो हत्या को दंडनीय अपराध बना दिया था। स्वतंत्रता संग्राम में भी अंग्रेजों ने जब कारतूस में गाय की चर्बी का इस्तेमाल किया तो भारतीय सैनिक मंगल पांडेय ने इसके विरोध में क्रांति का बिगुल फूंका, जिसके फलस्वरूप अंग्रेज सेना के सभी हिंदू सैनिकों ने विद्रोह कर दिया और 1857 की क्रांति की शुरूआत हो गई।
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कोर्ट ने कहा कि सदियों से हिंदू गाय की पूजा करते चले आए हैं और यह बात गैर हिंदू भी समझते हैं। मौलाना मुहम्मद अली, शौकत अली, हकीम अजमल खां, मियां हाजी अहमद खत्री, मियां छोटानी, मौलाना अब्दुल बारी, मौलाना अब्दुल हुसैन, अहमद मदनी जैसे राष्ट्रवादी मुसलमानों ने गो हत्या न करने की अपील की थी। 

1919 के खिलाफत आंदोलन में यह सभी मुस्लिम नेता शामिल थे। ख्वाजा हसन नियामी की किताब तार्क ए गाओ कुशी में गो हत्या न करने बात लिखी गई है। सम्राट अकबर, बाबर और हुमायूं ने गो हत्या न करने अपील की थी क्योंकि इससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। जमीयत ए उलेमाए हिंद के मौलाना महमूद मदनी ने गो हत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्रीय कानून की मांग की है। कोर्ट ने कहा कि देश का बहुसंख्यक मुस्लिम नेतृत्व हमेशा गो हत्या पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में रहा है।
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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की दी नजीरें
कोर्ट ने फैसले में संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की नजीर देते हुए कहा कि मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों के बारे में चंपकम दौरे राजन के केस में कहा गया है कि राज्य के नीति निदेशक तत्वों को मौलिक अधिकारों के अध्याय के अनुरूप और सहायक के रूप में चलना होगा। निदेशक सिद्धांत मौलिक हैं और इनको लागू करना राज्य का कर्तव्य है। 
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भारतीय पशु कल्याण बोर्ड बनाम ए नागराज और दो अन्य मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने
जल्लीकट्टू में बैलों पर अत्याचार पर प्रतिबंध लगाया है। सर्वोच्च अदालत ने माना कि अनुच्छेद 21 के तहत जानवरों के जीवन की रक्षा की जानी चाहिए क्योंकि प्रत्येक प्रजाति को जीवन की रक्षा का अधिकार है। फैसले में जीवन शब्द की विस्तार से परिभाषा दी गई है। जिसमें पशु जीवन सहित वह सभी जीवन शामिल हैं, जो मानव जीवन के लिए आवश्यक है। यह राज्य का कर्तव्य है कि पशु संरक्षण के लिए कानून बनाए।

कोर्ट ने कहा कि अब्दुल कुरैशी बनाम बिहार राज्य के केस में सुप्रीमकोर्ट ने गो हत्या पर प्रतिबंध संबंधी कानून पर कहा है कि हिदायत या कुरान जैसे इस्लामिक धर्मग्रंथों में गो हत्या को अनिवार्य नहीं माना है। इसके बजाए ऊंट और बकरी की बलि देने की अनुमति दी है।

विज्ञान व सभी धर्म मानते हैं कि गाय उपयोगी पशु
कोर्ट ने कहा कि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गाय उपयोगी पशु है। गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है ओर ऑक्सीजन ही छोड़ता है। गाय के दूध, घी, गोबर, गोमूत्र, दही से तैयार पंचगव्य कई रोगों में लाभकारी है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार गाय में 33 कोटि देवी देवता निवास करते हैं।

हजारों साल पहले लिखे गए यर्जुवेद में गाय को गौर अनुपमेय, ऋृगवेद में अघन्या, अर्थवेद में संपत्तियों का घर कहा गया है। भगवान शंकर का वाहन नंदी गो वंश है। तीर्थंकर रामदेव का चिन्ह बैल है। ईसा मसीह ने कहा है कि गाय या बैल को मारना मनुष्य को मारने के समान है। भगवान बुद्ध गायों को मनुष्यों का मित्र बताते हैं।
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