भारतीय पशु कल्याण बोर्ड बनाम ए नागराज और दो अन्य मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने
जल्लीकट्टू में बैलों पर अत्याचार पर प्रतिबंध लगाया है। सर्वोच्च अदालत ने माना कि अनुच्छेद 21 के तहत जानवरों के जीवन की रक्षा की जानी चाहिए क्योंकि प्रत्येक प्रजाति को जीवन की रक्षा का अधिकार है। फैसले में जीवन शब्द की विस्तार से परिभाषा दी गई है। जिसमें पशु जीवन सहित वह सभी जीवन शामिल हैं, जो मानव जीवन के लिए आवश्यक है। यह राज्य का कर्तव्य है कि पशु संरक्षण के लिए कानून बनाए।
कोर्ट ने कहा कि अब्दुल कुरैशी बनाम बिहार राज्य के केस में सुप्रीमकोर्ट ने गो हत्या पर प्रतिबंध संबंधी कानून पर कहा है कि हिदायत या कुरान जैसे इस्लामिक धर्मग्रंथों में गो हत्या को अनिवार्य नहीं माना है। इसके बजाए ऊंट और बकरी की बलि देने की अनुमति दी है।
विज्ञान व सभी धर्म मानते हैं कि गाय उपयोगी पशु
कोर्ट ने कहा कि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गाय उपयोगी पशु है। गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है ओर ऑक्सीजन ही छोड़ता है। गाय के दूध, घी, गोबर, गोमूत्र, दही से तैयार पंचगव्य कई रोगों में लाभकारी है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार गाय में 33 कोटि देवी देवता निवास करते हैं।
हजारों साल पहले लिखे गए यर्जुवेद में गाय को गौर अनुपमेय, ऋृगवेद में अघन्या, अर्थवेद में संपत्तियों का घर कहा गया है। भगवान शंकर का वाहन नंदी गो वंश है। तीर्थंकर रामदेव का चिन्ह बैल है। ईसा मसीह ने कहा है कि गाय या बैल को मारना मनुष्य को मारने के समान है। भगवान बुद्ध गायों को मनुष्यों का मित्र बताते हैं।